पारंपरिक वेशभूषा में मांदर की थाप पर झूमे लोक कलाकार
बड़कागांव: प्रखंड अंतर्गत पोटंगा न्यू बरटोला में पंचायत स्तरीय करम महोत्सव का आयोजन किया गया। महोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि संथाल समाज दिशोम मांझी परगना केन्द्रीय महासचिव सोनाराम मांझी, विशिष्ट अतिथि संथाल समाज दिशोम मांझी परगना केन्द्रीय कोषाध्यक्ष एतवा मांझी, संथाल समाज दिशोम मांझी कर्णपुरा परगना अध्यक्ष सूरज बेसरा, सम्मानित अतिथि पोटंगा पंसस बभनी देवी, संथाल समाज दिशोम मांझी परगना केन्द्रीय सचिव अजय बेसरा शामिल हुए।
सर्वप्रथम आयोजिकों के द्वारा अतिथियों का संथाली रीति रिवाज के साथ स्वागत किया गया। तत्पश्चात अतिथियों को बैच व अंगवस्त्र पहना कर सम्मानित किया गया। महोत्सव का विधिवत उद्घाटन अतिथियों के द्वारा फीता काट कर किया गया। महोत्सव में कलाकारों को अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुति के लिए बीस मिनट का समय निर्धारित किया गया था। सभी टीमों ने संथाली परिधानों में अपनी संस्कृति में करम गीत झुमर नाच व मांदर की थाप में सांस्कृतिक कार्यक्रम को प्रस्तुत किया।
करम महोत्सव में प्रथम पुरस्कार न्यू बरटोला की टीम को नगद पन्द्रह हजार रूपए व बड़ा खस्सी मुख्य अतिथि सोनाराम मांझी, एतवा मांझी, कपिल हेम्ब्रोम, रामकिशोर मुर्मू, बब्लू हेम्ब्रोम, पन्नालाल मुर्मू, प्रदीप सोरेन, सुधीर बास्के, चुन्नु राम बेसरा, श्यामदेव सोरेन, टीरू सोरेन, अनिल टुडू के द्वारा पुरस्कार दिया गया। द्वितीय पुरस्कार पसेरिया पुरन टोला की टीम को नगद दस हजार रुपए व छोटा खस्सी, संथाल समाज दिशोम मांझी कर्णपुरा परगना अध्यक्ष सूरज बेसरा, विश्राम सोरेन, गणेश सोरेन सुरेश मुर्मू के द्वारा पुरस्कार दिया गया। तृतीय पुरस्कार मुर्गा टोला मांझी हड़ाम की टीम को नगद राशि पांच हजार रुपए व खस्सी संथाल समाज दिशोम मांझी पंचायत पोटंगा कमिटी बिनोद हेम्ब्रोम, बिरसा हेम्ब्रोम, राजेन्द्र सोरेन द्वारा पुरस्कृत किया गया।
मौके पर मुख्य अतिथि सोनाराम मांझी ने कहा कि हमारे पूर्वज शुरू से ही करम त्यौहार मनाते आ रहे हैं। लेकिन लोग आज के समय में अपनी संस्कृति से दूर हो रहें हैं। हमलोगों को अपनी संस्कृति और परंपरा को को भूलना नहीं है, क्योंकि इससे ही हमारा अस्तित्व और हमारी पहचान है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में लुगु बुरु घंटा बाड़ी धोरोम गाढ़ भी हमलोगों से छीनने का प्रयास किया जा रहा है। हमें एकजुट होकर उसे बचाना है।
विशिष्ट अतिथि संथाल समाज दिशोम मांझी परगना केन्द्रीय कोषाध्यक्ष एतवा मांझी ने कहा कि संथाल आदिवासियों का धरोहर है यहां की अलग संस्कृति है। संथाल समाज के लोग जन्म में मुंडन, शादी, मृत्यु और ब्रह्मभोज में हमलोग आज तक किसी पंडित या अन्य जाति के लोगों पर निर्भर नहीं रहते हैं।
वहीं विशिष्ट अतिथि संथाल समाज दिशोम मांझी कर्णपुरा परगना अध्यक्ष सूरज बेसरा ने कहा कि संथाल आदिवासी कल्चर का नाम पूरे देश में गुंजना चाहिए। ताकि सबको पता चले कि देश में संथाल आदिवासी किसी से कम नहीं है। संथाल आदिवासी को सम्मान और अधिकार देना होगा।
वहीं संथाली संस्कृति कल्चर के अनुभवी सुधीर बास्के, मंसिग मार्सल शिक्षक कपिल हेम्ब्रोम, राम किशोर मुर्मू, चुन्नु राम बेसरा, पन्नालाल मुर्मू, प्रदीप सोरेन, टीरू सोरेन, अनिल टुडू ने निर्णायक की भूमिका निभाई।
अवसर पर सन्नी सोरेन, विश्राम सोरेन, संथाल समाज दिशोम मांझी परगना केन्द्रीय सदस्य श्यामदेव सोरेन, बब्लू हेम्ब्रोम, गणेश सोरेन, पंचायत अध्यक्ष बिनोद हेम्ब्रोम, पंचायत सचिव बिरसा हेम्ब्रोम, पंचायत कोषाध्यक्ष राजेन्द्र सोरेन, सुरेश मुर्मू, संथाल समाज दिशोम मांझी परगना डाड़ी प्रखंड उपाध्यक्ष लक्ष्मण हंसदा, वार्ड सदस्य रीना देवी, फुलमती देवी, अनिता मरांडी, बरटोला मांझी हड़ाम दिनेश्वर सोरेन, पराणिक हड़ाम लेचा मांझी, नायके हड़ाम पहान मांझी, कुडम नायके कोका मांझी, जोगवा हड़ाम छोटका मांझी, सहदेव मांझी, गोविन्द मांझी उपस्थित थे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में पोटंगा उप मुखिया सह अध्यक्ष रविन्द्र सोरेन, सचिव रमेश हंसदा, कोषाध्यक्ष सुखराम बेसरा, सदस्य त्रिलोक सोरेन, योंगा किस्कू, करमा मांझी, तल्लु सोरेन, चमेश लाल सोरेन, रमेश हेम्ब्रोम, तालो मांझी, बिनोद सोरेन, महालाल, राजेश, नरेश, बाजो बंशीलाल, अनिल, सिकेन्द्र, प्रदीप, सुरेश, सुनिल, महेन्द्र, मुन्ना, राम, छोटु, राहुल, पवन, समीर, दिलीप, साहिल, लुगु, बिरालाल, संजय, कर्नल, अरुन रवि, विकास पांडु सहित कई लोगों का सराहनीय योगदान रहा।