कोडरमा: एसोसिएशन फॉर एडवोकेसी एंड लीगल इनिशिएटिव्स ट्रस्ट (आली) एवं समर्पण की ओर से कोडरमा स्थित होटल सेलिब्रेशन में विभिन्न हितधारकों के साथ सुरक्षित पलायन एवं मानव तस्करी विषय पर जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन शनिवार को किया गया।
कार्यशाला के बतौर मुख्य अतिथि जिप सदस्य शांति प्रिया विशिष्ट अतिथि स्थायी लोक अदालत के प्रभारी अध्यक्ष बालेश्वर राम, सीडब्लूसी के सदस्य अनिल सिंह, मनरेगा लोकपाल धरनीधर प्रसाद, महिला थाना प्रभारी मदन मुंडा, बाल कल्याण पदाधिकारी देखरेख अर्चना ज्वाला, जेजे कॉलेज के प्रो. राजेश कुमार, ज्ञान विज्ञान समिति के असीम सरकार, रांची से आई आली की राज्य समन्वयक रेशमा सिंह उपस्थित थे।
मौके पर मुख्य अतिथि जिप सदस्य शांति प्रिया ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि आर्थिक अवसरों की कमी की वजह से लोग मजबूरन पलायन करते हैं। बेहतर अवसरों की तलाश में हो और सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा बरकरार रहे तो ठीक है परन्तु जब यह पलायन अधिकारों को खत्म करके, बाजबरन हो, लोभ लालच में आकर शोषण का हिस्सा बन जाए तो यह हम सभी के लिए अभिशाप है। ऐसे दृश्य को ही हम मानव तस्करी के रूप में देख सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे कोडरमा जिला में रोजगार के अवसर लगातार खत्म हो रहे हैं। लोग मजबूरन पलायन को विवश हैं।
स्थायी लोक अदालत के प्रभारी अध्यक्ष बालेश्वर राम ने कहा कि मानव तस्करी की घटनाओं के मामले में झारखंड प्रमुख राज्यों में से एक है, आयें दिन अखबारों में पढ़ने को मिलता है यह हम सभी के लिए अपनी प्रगतिशीलता पर प्रश्न चिन्ह है।
सीडब्लूसी के सदस्य अनिल सिंह ने कहा कि जैसे-जैसे लोगों में सामाजिक जागरूकता आ रही है, वैसे वैसे बच्चों एवं महिलाओं से संबंधित मामले दर्ज होने लगे हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी को अधिकारों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध तंत्र का उपयोग करना चाहिए।
ट्रस्ट की राज्य समन्वयक रेशमा सिंह एवं बबली ने बचाव और पुनर्वास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को काम करने और ऐसे जीवन परिवर्तनकारी निर्णय लेने के लिए सामाजिक रीतियों को तोड़ना पड़ता है। उन्हें अक्सर अपनी गतिशीलता का इस्तेमाल करने के लिए बहुत साहस दिखाना पड़ता है। नैतिक मानदंडों से जूझना पड़ता है। महिलाएं इस समय बेहतर आजीविका, आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक संबंध जोड़ने के इरादे से पुरुषों से साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपने घरों/राज्यों या यहां तक की देश से बाहर निकल रही हैं। ऐसे में असुरक्षित गतिशीलता की रोकथाम जरुरी है। उन्होंने नीतियों एवं प्रक्रियाओं पर विशेष प्रकाश डाला। मानव तस्करी के घिनौने अपराध को जड़ से खत्म करने के लिए और दलालों को चिन्हित करते हुए गरीब और मासूम लड़कियों को मानव तस्करी के दलदल में फंसने से बचाने के लिए लोगों ने अपनी-अपनी जबाबदेही जिम्मेदारी ली.
कार्यशाला को मनरेगा लोकपाल धरनीधर प्रसाद, अधिवक्ता प्रवीण कुमार सिन्हा, प्रो. राजेश कुमार, अधिवक्ता सुमन जयसवाल, अर्चना ज्वाला, अधिवक्ता ऋषि कान्त, असीम सरकार, सूचना अधिकार मंच के आरके बसंत, वार्ड पार्षद रिया राज, अमित राज अयोध्या यादव, पूनम साहू, मेरियन सोरेन, सुनीता देवी, सुरभि कुमारी ने भी संबोधित किया।
कार्यशाला का संचालन समर्पण संस्था के सचिव इन्द्रमणि साहू एवं धन्यवाद ज्ञापन जितेन्द्र कुमार सिंह ने किया।