खूंटी: झारखंड प्रदेश आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन की जिला समिति खूंटी के बैनर तले उपायुक्त कार्यालय खूंटी के समक्ष छह सुत्री मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। मौके पर झारखंड प्रदेश आंंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष वीणा सिन्हा ने कहा कि हमें मानदेय नहीं वेतन तनख्वाह चाहिए तथा सेवानिवृत्ति के पश्चात एक मुश्त पांच लाख रुपए दें।
प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बालमुकुन्द सिन्हा ने एकजुटता पर बल देते हुए कहा कि हम शांति पूर्ण आन्दोलन के बल पर अपनी सभी मांगों लेकर रहेंगे नहीं तो राज्य एवं केंद्र सरकार के खिलाफ एवं अपनी मांग के समर्थन में रांची से दिल्ली तक जोरदार आन्दोलन करेंगे।
इस दौरान जिलाध्यक्ष रंजीता देवी ने कहा कि जब तक हमारी छह सुत्री मांगें सरकार पूरी नहीं करती है तो हम चैन से सरकार को रहने नहीं देंगे। हम उधार पोषाहार नहीं चलाऐंगे। सरकार हमें केन्द्रीय कर्मी का दर्जा दें।
जिला संयोजक अनिल भगत ने कहा कि पोषण से संबंधित कार्य आंगनबाड़ी का है परन्तु सरकार समय पर सेविका-सहायिका को पोषाहार एवं मानदेय नहीं देकर कुपोषण को बढ़ावा देने की कार्य कर रही है। वहीं सरकार सेविकाओं को अन्य कार्यों में लगाकर बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रही है। धरना-प्रदर्शन की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष रंजीता देवी एवं संचालन बिराजमनी गुड़िया और रेखा देवी द्वारा किया गया।
धरना प्रदर्शन के पश्चात मुख्यमंत्री के नाम पर छह सूत्री मांग पत्र उपायुक्त खूंटी को सौंपा गया। सौंपें गए मांग पत्र में कहा गया है कि आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका को केंद्रीय कर्मचारी घोषित किया जाए तथा श्रमिक का दर्जा दिया जाए, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका को सेवानिवृत्ति होने पर पांच लाख रुपए एकमुश्त आर्थिक लाभ दिया जाए तथा मानदेय का आधा पेंशन लागू किया जाए, कार्यावधि में सेविका-सहायिका की मृत्यु होने पर पांच लाख रुपया दिया जाए तथा राज्य सरकार द्वारा अनुकंपा का नियमावली बनाई गई है इसमें सुधार किया जाए, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका को ग्रेच्युटी पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कार्यान्वयन के लिए तत्काल पालन किया जाए, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका से उधार पोषाहार क्रय कराना बंद किया जाए एवं पोषाहार की अग्रिम राशि पहले की तरह संयुक्त खाता में उपलब्ध कराई जाए, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका का बकाया मानदेय एवं पोषाहार भुगतान किया जाए, पोषाहार का सरकार मूल्य वर्तमान बाजार मूल्य में काफी अंतर है पोषाहार भुगतान वर्तमान बाजार मूल्य पर निर्धारित किया जाए, हर वर्ष महंगाई को देखते हुए आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका को महंगाई भत्ता दिया जाए तथा केंद्र से परियोजना आने-जाने का डीए भत्ता दिया जाए, बाल विकास परियोजना में कार्यरत सुपरवाइजर एलएस का स्थानांतरण पहले 3 वर्ष में प्रमंडल आयुक्त कार्यालय से होता था जिसका 3 वर्ष कार्यकाल पूरा होने पर स्थानांतरण हो जाता था लेकिन जब से निदेशालय विभाग से स्थानांतरण होने लगा है तब से सुपरवाइजर एक ही परियोजना में 4 से 8 वर्ष तक अपने पद पर लगातार कार्यरत होने के कारण आंगनबाड़ी केंद्रों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है इसलिए विभाग से अभिलंब जांच कराकर इनका प्रमंडल स्तर पर स्थानांतरण किया जाए, आंगनबाड़ी सेविका निर्वाचन बीएलओ का कार्य करने से आईसीडीएस का कार्य बाधित हो रहा है जिसे बीएलओ से सेविका को मुक्त किया जाए।
धरना प्रदर्शन में मुख्य रूप से झारखंड प्रदेश आंंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन की प्रदेश संयोजक आभा देवी, सेफाली प्यादा, रांची जिलाध्यक्ष रेश्मा केरकेट्टा, जिलाध्यक्ष रंजीता देवी, जिला उपाध्यक्ष हेमंती देवी, सचिव जयवंती नाग, कोषाध्यक्ष बसंती बारला, मुरहू प्रखंड अध्यक्ष अल्मा टुटी, खूंटी प्रखंंड अध्यक्ष रेखा देवी, अड़की प्रखंड अध्यक्ष पंचमी देवी, तोरपा प्रखंड अध्यक्ष बिराजमनी गुड़िया, रनिया प्रखंड अध्यक्ष सुजाता देवी, कर्रा प्रखंड अध्यक्ष प्रभा बखला, सरिता मांझी, फुलकेरिया टोप्पो, सहित कई सेविका, सहायिका मौजूद थे।
