रामगढ़: जिला समाहरणालय में शनिवार को उप विकास आयुक्त आशीष अग्रवाल की अध्यक्षता में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (पलाश) अंतर्गत संचालित योजनाओं की समीक्षात्मक बैठक हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संचालित सामाजिक संगठन एवं संस्थागत निर्माण,आजीविका, गैर कृषि, वित्तीय समावेशन, सामाजिक विकास से जुड़ी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर उनके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जाना है।

बैठक में सामाजिक संगठन एवं संस्थागत निर्माण, वित्तीय समावेशन, आजीविका, गैर-कृषि एवं सामाजिक विकास डोमेन से संबंधित कार्यों की बिंदुवार समीक्षा की गई। उप विकास आयुक्त ने सभी डोमेन की अद्यतन प्रगति की जानकारी लेते हुए योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। एसएमआईबी डोमेन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों, ग्राम संगठनों एवं संकुल स्तरीय संघों के सुदृढ़ीकरण, नियमित बैठकों एवं क्षमता संवर्धन पर जोर दिया गया। साथ ही ऋण के समयबद्ध पुनर्भुगतान, फूलो-झानो अभियान के अंतर्गत सफल लाभार्थियों की प्रेरणादायी कहानियों के संकलन तथा वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने के निर्देश दिया गया। वित्तीय समावेशन डोमेन की समीक्षा के दौरान समूहों को अधिकतम ऋण बढ़ाने, मुद्रा ऋण उपलब्ध कराने, सभी लाभार्थियों का शत-प्रतिशत बीमा कवरेज तथा बीमा निपटान हेतु सुनिश्चित करने, एनपीए की नियमित समीक्षा एवं बी सी सखी की कार्यकुशलता बढ़ाने हेतु एक्सपोज़र प्रशिक्षण देने के निर्देश दिया गया।आजीविका डोमेन में कृषि एवं पशुपालन आधारित गतिविधियों की प्रगति पर चर्चा की गई।

वहीं पशुधन प्रविष्टि, एफपीओ के (इक्विटी मैचिंग ग्रांट ) से सम्बंधित समीक्षा, एफपीओ सदस्यों तथा स्टाफ को प्रोक्योरमेंट से सम्बंधित प्रशिक्षण तथा इंतिग्राटेड फार्मिंग क्लस्टर में बही खाता अध्यतन को सुदृढ़ कराने हेतु निर्देश दिया गया। गैर-कृषि डोमेन के अंतर्गत कौशल प्रशिक्षण, खाद्य प्रसंस्करण एवं अन्य गतिविधियों की समीक्षा की गई, वहीं सामाजिक विकास डोमेन में  स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता एवं सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों को प्रभावी तरीके से लागू करने का निर्देश दिया गया। बैठक में जिला कार्यक्रम प्रबंधक, सभी डोमेन प्रबंधक, प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक, प्रखंड परियोजना पदाधिकारी एवं क्षेत्र समन्वयक उपस्थित रहे।

बैठक के अंत में उप विकास आयुक्त ने आपसी समन्वय के साथ लक्ष्य आधारित कार्य करने, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा अनुदान एवं ऋण उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही नियमित क्षेत्र भ्रमण कर योजनाओं की भौतिक समीक्षा करने पर भी बल दिया गया।

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