विस्थापित समिति न्यू बिरसा पोटंगा ने फागु बेसरा और संजीव बेदिया को किया सम्मानित
बड़कागांव : विस्थापित समिति न्यू बिरसा पोटंगा के द्वारा झारखंड मुक्ति मोर्चा के केन्द्रीय महासचिव सह झारखंड राज्य समन्वय समिति के सदस्य कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त फागु बेसरा एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय सचिव सह राज्य परिवहन प्राधिकार के सदस्य संजीव बेदिया का अभिनंदन सह सम्मान समारोह का आयोजन विस्थापित समिति, न्यू बिरसा पोटंगा कार्यालय के समीप सोमवार को किया गया। सभा की अध्यक्षता सोनाराम मांझी, संचालन उप मुखिया रविन्द्र सोरेन ने किया। समारोह में बतौर मुख्य अतिथि झारखंड मुक्ति मोर्चा के केन्द्रीय महासचिव सह झारखंड राज्य समन्वय समिति के सदस्य कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त फागु बेसरा, विशिष्ट अतिथि झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय सचिव सह राज्य परिवहन प्राधिकार के सदस्य संजीव बेदिया उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ झारखंड के वीर सपूतों के चित्र पर माल्यार्पण कर एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया। तत्पश्चात विस्थापित समिति के द्वारा मुख्य अतिथि फागु बेसरा एवं विशिष्ट अतिथि संजीव बेदिया को 52 किलो का फूलों की माला पहनाकर स्वागत किया गया।
मौके पर मुख्य अतिथि झारखंड मुक्ति मोर्चा के केन्द्रीय महासचिव सह झारखंड राज्य समन्वय समिति के सदस्य कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त फागु बेसरा ने कहा कि 40 साल तक अलग राज्य की लड़ाई लड़ी गई। उसके बाद 2000 में झारखंड मिला। झारखंड बनने के बाद यहां पर गुरुजी का राज होना चाहिए था लेकिन जो लोग झारखंड के विरोधी झारखंड की सत्ता उन्हीं के हाथों में चली गई। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में यहां का राजपाट चला। जिस झारखंड का सपना शिबू सोरेन ने देखा था वह झारखंड नहीं बन पाया। 2019 में झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार बनी। सरकार बनने के 2 साल कोरोना महामारी में चला गया। कोरोना के समय पूरी दुनिया प्रभावित रही। झारखंड में कहीं भी कोई काम नहीं हो सका। हम लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया। महामारी के खत्म होने के बाद हेमंत सोरेन की सरकार ने ताबड़तोड़ विकास कार्य कर रही है।
देश में यह पहला राज्य बना जहां सर्वजन पेंशन योजना लागू किया गया। पहले सरकार की तरफ से पढ़ाई के लिए कोई सहयोग नहीं मिलता था। लेकिन हेमंत सोरेन की सरकार ने गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़े वर्ग को उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने तक की व्यवस्था की। डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस, आईपीएस बनने के लिए हेमंत सोरेन ने झारखंड में छात्रवृत्ति योजना लागू किया।अब गरीब का भी बच्चा पड़ेगा, लिखेगा और डॉक्टर इंजीनियर, आईएएस, आईपीएस बनेगा। अगर उसके लिए जरूरत पड़े तो हेमंत सोरेन की सरकार विदेश भी जाने की व्यवस्था करेंगी। एनडीए की सरकार ने पिछड़ा वर्ग, एसटी, एससी के आरक्षण को घटा कर कम कर दिया। हेमंत सोरेन सरकार जल्द ही विस्थापितों की समस्याओं के समाधान को लेकर विस्थापन आयोग का गठन करने जा रही है। उन्होंने कहा कि जीएम लैंड जमीन का जोत कोड़ करने वाले को जमीन का मुआवजा और नौकरी देना होगा। यहां के विस्थापितों को एक करोड़ रुपए का ठेका पट्टा का कार्य दिया जाए और कोयला उत्पादन का 40 प्रतिशत कोयला लोकल सेल के माध्यम से उठाया जाए। जिससे की विस्थापित बेरोजगारों को रोजगार मुहैया हो सके। हेमंत सोरेन ने राज्य के लिए इतिहास लिख दिया कि यहां पर जितनी भी निजी कंपनीयां आएगी। वहां पर 75 प्रतिशत वहां के स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाए।
उन्होंने यहां के विस्थापित को एकजुट होकर कार्य करें कोई समस्या हो तो उसे मिल जुल कर हल करें। आने वाले दिनों में लोकसभा और विधानसभा चुनाव होना हैं। इसमें हम लोगों को प्रयास करना है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा का जनप्रतिनिधि ज्यादा से ज्यादा चुनाव जीते। जब आपका विधायक, आपका सांसद, आपका मुखिया, आपका प्रतिनिधि होगा तो हर समस्या का समाधान करने में आसानी होगा।
विस्थापितों को एकजुट होना होगा : संजीव बेदिया
विशिष्ट अतिथि झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय सचिव सह राज्य परिवहन प्राधिकार के सदस्य संजीव बेदिया ने कहा कि सीसीएल प्रबंधन विस्थापितों की समस्या का समाधान नहीं करती है तो यहां से एक भी कोई लाभ बाहर जाने नहीं दिया जाएगा हेमंत सोरेन सरकार ने यह घोषणा किया है कि कहीं भी कोई निजी कंपनी कार्य करती है तो वहां के 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार देना होगा। हम लोग आदिवासी हैं और जंगलों में रहना जानते हैं यहां के विस्थापितों को एकजुट होना होगा तभी हर समस्या का समाधान किया जा सकता है। अगर कोई हम लोगों को आपस में लड़ाने का काम करता है तो ऐसे लोगों को हम छोड़ेंगे भी नहीं।
सम्मान समारोह में ये रहे उपस्थित
सम्मान समारोह में मुख्य रूप से रैयत विस्थापित मोर्चा केन्द्रीय महासचिव सैनाथ गंझू, रैयत विस्थापित मोर्चा केन्द्रीय कार्यवाहक कोषाध्यक्ष सोनाराम मांझी, झामुमो हजारीबाग जिला उपाध्यक्ष संजय करमाली, मुकेश रावत, सी.सी.एल. रैविमो बरका-सयाल क्षेत्रीय अध्यक्ष सूरज बेसरा, रैविमो बरका-सयाल क्षेत्रीय सचिव मोहन सोरेन, सोनाराम टुडू, पोटंगा विस्थापित सचिव जीतन मुंडा, मुरसिग लाल हंसदा, संजय टुडू, गोविन्द मांझी, उदय मालाकार, संजय वर्मा, गणेश गंझू, विश्वनाथ मांझी, अकल मुंडा, झानाराम मांझी, मनोज मुंडा, संतोष सिंह, सन्नी बेसरा, बिरेंद्र मांझी, पोटंगा पसंस बभनी देवी, रेशमी हंसदा, बिनोद हेम्ब्रोम, सन्नी सोरेन, लेचा मांझी, जुरा सोरेन, लाल बिहारी मांझी, योंगा किस्कू, पंकज हेम्ब्रोम, मनुलाल सोरेन, महावीर मुर्मू, रैना मांझी, राजेन्द्र गंझू, सहदेव मांझी, लालधारी मांझी, सुखराम बेसरा, महेश बेसरा, अजय करमाली, आनंद बेसरा, अजय बेसरा, प्रेम सोरेन, अजय मरांडी, राजू करमाली, बन्शीलाल मुर्मू, विजय सोरेन, महेश बेसरा, दिनेश मुंडा, अनुज मुंडा, गहन बेसरा, सोलेन हंसदा, परमेश्वर सोरेन, अर्जुन मुंडा, दिलीप बेसरा, बसंत हेम्ब्रोम, बिनोद बेसरा, राजेश मुर्मू, चन्द्र देव मुंडा, राजेश हंसदा, नरेश बेसरा, पप्पु लाल मांझी, जग्गू मुंडा, गणेश सिंह, सुरजा मांझी, मोती लाल मुर्मू, रामकुमार सोरेन, बिनोद प्रजापति, संजय सोरेन, कमेश्वर मुंडा, मनाराम टुडू, बिनोद मांझी, सुरेश मांझी, अजय गंझू, दौलेन मिंज, सुशिला देवी, अनीता देवी, तारा देवी, उषा देवी, डोड़को देवी, क्रांति किस्कू, ममता देवी, पानो देवी, तालोमुनी देवी, करमी देवी, पुनम देवी, सरिता बेसरा, अनिता हंसदा, मुनिया देवी, सावित्री देवी, मंझली देवी, सुनीता देवी, बेबी देवी, लक्ष्मी देवी, सोनमती देवी, फूलमती देवी, अनिता मरांडी, कपरा देवी, शांति देवी, सुरजीत देवी सहित कई विस्थापित ग्रामीण मौजूद थे।