रामगढ़: भुरकुंडा में वन विभाग की महत्वाकांक्षी साल (सखुआ) वृक्ष की नर्सरी का बड़ा प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ है। सीसीएल के सहयोग से अप्रैल 2024 में शुरू हुई कवायद 22 महीने बाद भी ठंडी पड़ी हुई है। लंबे समय से प्रोजेक्ट को लेकर धरातल पर कोई भी सुगबुगाहट नहीं दिख रही है। योजना के तहत वर्ष 2024 में भुरकुंडा लोकल सेल डिपो से लेकर पावर हाउस तक छह एकड़ जमीन का समतलीकरण किया गया और जल निकासी के लिए नाली निर्माण कराया गया। इसके साथ ही नर्सरी के लिए चिन्हित जमीन को लोहे के जाली लगाकर सुरक्षित किया गया था। हालांकि तब नाली निर्माण में लगते पत्थरों को लेकर कुछ विवाद की भी चर्चा उठी थी। जिसके बाद से योजना में कोई भी प्रगति नहीं देखी जा रही है। झारखंड की सबसे बड़ी साल वृक्ष की नर्सरी फिलहाल सब्जबाग ही प्रतीत हो रही है। लहलहाते वृक्षों की परिकल्पना, हरियाली के दावे और स्थानीय स्तर पर रोजगार की उम्मीदें फिलहाल परती पड़ी जमीन पर धूल फांक रही हैं।
बहरहाल, भुरकुंडा में राज्य की सबसे बड़ी साल वृक्ष की नर्सरी की सुगबुगाहट से क्षेत्र के लोग काफी हर्षित थे। वर्तमान में सब्जबाग प्रतीत हो रही योजना उनकी आशाओं पर पानी फेरती दिख रही है। हालांकि देर-सवेर प्रोजेक्ट पूरा हो जाए तो यह निश्चित रूप से क्षेत्र को गौरवान्वित करेगा। इस संबंध में वन प्रमंडल पदाधिकारी से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
तीन वर्षों में पूरा होना है प्रोजेक्ट
प्रोजेक्ट की शुरुआत में वन प्रमंडल पदाधिकारी ने 16 अप्रैल 2024 को दूरभाष पर बताया था कि वन विभाग सीसीएल के सहयोग से तीन वर्षों में इस प्रोजेक्ट को पूरा करेगा। यहां तैयार होनेवाले साल वृक्ष के पौधे देश और राज्य के कोने-कोने में प्लांटेशन के लिए भेजे जाएंगे। नर्सरी में एक साथ तकरीबन 10 हजार पौधे तैयार होंगे। साल वृक्ष की नर्सरी पर आधारित राज्य का यह पहला प्रोजेक्ट होगा।
क्या कहते हैं वन विभाग के रेंजर
नर्सरी प्रोजेक्ट की प्रगति के संबंध में वन क्षेत्र पतरातू के रेंजर राकेश कुमार सिंह ने दूरभाष पर बताया कि तात्कालीन रेंजर सेवानिवृत्त हो चुके हैं। मेरी पदस्थापना बाद में हुई है। योजना के संबंध में मुझे जानकारी नहीं है। इस संबंध में वरीय अधिकारी ही स्पष्ट रूप से बता सकते हैं।
