बड़़कागांव: उरीमारी पंचायत के हेसाबेड़ा स्थित सरना स्थल जाहेर थान में मांझी हड़ाम सीताराम किस्कू की अध्यक्षता में ग्रामीणों की बैठक गुरुवार को हुई। बैठक में आगामी 18-19 मार्च को आयोजित होने वाले बाहा परब को लेकर विस्तृत रूप से चर्चा की गई एवं कार्यक्रम का रूपरेखा तैयार किया गया।
चर्चा के दौरान जाहेर थान की साफ-सफाई, प्रत्येक घर से जमा हुए सहयोग राशि का आकलन, सरना स्थल की साज सजावट की सामग्री व साउन्ड, पूजा में उपयोग होने वाले विभिन्न सामग्रियों की खरीदारी की समीक्षा की गई। बाहा पोरोब को हर्षोल्लास के साथ मनाने के लिए मांझी हड़ाम सीताराम किस्कू के द्वारा युवाओं को विभिन्न जिम्मेवारियां सौंपा गया और निर्देश दिया गया कि पूजा के दिन सभी ग्रामीण अपने पारंपरिक संथाली पोशाक में पहुंचे व जिनके घर में मांदर है वो जरुर लेते आएं। बैठक में निर्णय लिया गया कि आगामी 17 मार्च को गांव के सरना तालाब में सामुहिक रूप से मछली मारा जाएगा।
वहीं बैठक में जल, जंगल, जमीन और पर्यावरण को संरक्षित करने की बात भी कही गई। मांझी हड़ाम सीताराम किस्कू ने कहा कि हेसाबेड़ा बस्ती पूर्ण रूप से जल व वायु प्रदूषण के चपेट में है और सीसीएल प्रबंधन का रवैया यहां के विस्थापितों के प्रति बहुत ही उदासीन है। वर्तमान समय में पूरी बस्ती जल संकट से जूझ रहा है। जो पाइपलाइन पेयजल आपूर्ति के लिए सीसीएल द्वारा बिछाई गई थी वह पूरी तरह से सफेद हाथी साबित हो रहा है। वायु प्रदूषण के चलते हम ग्रामीण दूषित भोजन खाने व जल पीने के लिए विवश है।
उन्होंने कहा कि ऐसी जानकारी मिल रही है कि रेलवे साइडिंग से संप्रेषण कार्य जुलाई माह तक शुरू हो जाएगा। जिसके लिए कोयला उठाव को लेकर टेंडर और प्राइवेट कंपनियों को स्वीकृति भी मिल गई है। परंतु यह बेहद निराशाजनक है कि विस्थापितों को दरकिनार कर उनके लिए प्रबंधन के तरफ से रोजगार का कोई विकल्प सुझाया नहीं जा रहा है।
कहा कि हम अपने विस्थापित ग्रामीणों के रोजगार के लिए कटिबद्ध हैं। रेलवे साइडिंग से रोजगार के मुद्दे पर प्रबंधन के साथ वार्ता किया जाएगा और विस्थापितों को सुनिश्चित रोजगार देने के बाद ही संप्रेषण कार्य चालू किया जा सकता है। अगर सीसीएल प्रबंधन विस्थापितों को नजर अंदाज कर रेलवे साइडिंग का काम करती है तो विस्थापित सीसीएल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे।
बैठक में मुख्य रूप से मांझी हड़ाम सीताराम किस्कू, नायके हड़ाम बंसीलाल पवरिया, कुडम नायके हड़ाम प्रभु बेसरा, पराणिक हड़ाम संजीव सोरेन, जोगवा हड़ाम अजय किस्कू, कानू मरांडी, शनिचर किस्कू, कंचन मांझी, रमेश किस्कू, रवि पवारिया, सुरेश किस्कू, जतरू बेसरा, पुरण टुडू, राजेंद्र किस्कू, लालदेव सोरेन, शिगू हेम्ब्रोम, मनु टुडू, हेमलाल बेसरा, सोमरा किस्कू, प्रभु किस्कू, आनंद टुडू, सुरेंद्र हेम्ब्रोम, विकास किस्कू, छोटू सोरेन, जीतू मुर्मू, बरियत किस्कू, मोहन मांझी, राम बेसरा, विक्की पवारिया, देवा हेम्ब्रोम, अजय बेसरा, महेश मांझी, राजेश पवारिया, मनीष हेम्ब्रोम, किशन किस्कू, मुकेश बेसरा, भोला किस्कू, रोहित मरांडी, सुनील हेम्ब्रोम, रमजीत पवरिया, प्रभु किस्कू, रोशन किस्कू, अजय सहित कई ग्रामीण मौजूद थे।