रांची: वन संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता की चुनौतियों पर चर्चा के लिए झारखंड पहली बार नेशनल फॉरेस्ट्री कांग्रेस (NFC-2026) की मेजबानी करेगा। तीन दिवसीय सम्मेलन 10 से 12 दिसंबर तक रांची के मोरहाबादी स्थित स्कीपा (SKIPA) सभागार में आयोजित होगा। इसमें देशभर के वन प्रशासक, वैज्ञानिक, नीति निर्माता और शिक्षाविद हिस्सा लेंगे।

सम्मेलन की जानकारी देने के लिए शुक्रवार को वन भवन के विवेकानंद सभागार में प्रेस वार्ता हुई। इस दौरान प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख संजीव कुमार ने आधिकारिक ब्रोशर और वेब पोर्टल का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की धरती का लगभग एक-तिहाई हिस्सा वनों से ढका है। ऐसे में राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी राज्य के लिए गौरव का विषय है। मौके पर एटी मिश्रा, रवि रंजन, राजकुमार बाजपेयी समेत विभाग और वन उत्पादकता संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) के वैज्ञानिक मार्गदर्शन में आयोजित इस सम्मेलन में वन प्रबंधन को टिकाऊ बनाने, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने और वन आश्रित समुदायों की आजीविका मजबूत करने पर विचार होगा।

चर्चा के लिए 12 तकनीकी विषय निर्धारित किए गए हैं। इनमें जैव विविधता संरक्षण, वन आनुवंशिकी, कृषि वानिकी, खनन प्रभावित भूमि का पुनरुद्धार, कार्बन फॉरेस्ट्री, वन्यजीव प्रबंधन, वन अर्थशास्त्र, जीआईएस और रिमोट सेंसिंग शामिल हैं। वन जल विज्ञान, वन प्रशासन और अनुसंधान परियोजनाओं के निष्कर्षों पर भी विशेषज्ञ चर्चा करेंगे।

सम्मेलन में भाग लेने और शोध पत्र प्रस्तुत करने के लिए पंजीकरण निःशुल्क रहेगा। ऑनलाइन पंजीकरण 17 अक्टूबर से [https://appforest.jharkhand.gov.in/nfc](https://appforest.jharkhand.gov.in/nfc?utm_source=chatgpt.com) पर शुरू होगा। शोध सारांश जमा करने की अंतिम तिथि 20 नवंबर, स्वीकृति की सूचना 25 नवंबर और पूर्ण शोध पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 30 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है।