पहरा दुर्गा मंडप से घाघरा जल प्रपात तक निकली 501 कलशों की यात्रा 

हजारीबाग: मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की अराधना का पावन पर्व शारदीय नवरात्र का शुभारंभ कलश स्थापना के साथ हुआ। केरेडारी प्रखंड के पहरा में रविवार को अहले सुबह पूजा समिति पहरा के द्वारा दुर्गा मंडप से 501 कलशों की भव्य यात्रा निकाली गई। गाजे-बाजे के साथ जयकारा लगाते श्रद्धालु पैदल घाघरा जलप्रपात पहुंचे। जहां आचार्य कौलेश्वर मिश्रा ने वैदिक मंत्रोंच्चार के बीच माँ गंगे की पूजा-अर्चना की। यहां से अपने-अपने कलश में जल भरकर सभी श्रद्धालु वापस पूजा मंडप पहुंचे। जहां कलश स्थापना हुई। 

बताया जाता है कि इस बार बेलवरण पूजा 20 अक्टूबर दिन शुक्रवार को होगा। जबकि नवपत्रिका प्रवेश पूजन व पूजा पंडालों में देवी की स्थापना, कालरात्रि दर्शन पूजन व महानिशा पूजा 21अक्टूबर को किए जाएंगे। वहीं दुर्गा अष्टमी का व्रत पूजन, महागौरी दर्शन पूजन, अन्नपूर्णा परिक्रमा 22 अक्टूबर दिन रविवार होगी।

Navratri 2023

शुभ है मां का गज पर आना : कौलेश्वर मिश्रा

आचार्य कौलेश्वर मिश्रा बताते हैं कि धार्मिक और पौराणिक मान्यता के अनुसार यदि नवरात्र सोमवार या रविवार से शुरू हो रहा है, तो मां का वाहन गज होता है, स्पष्ट है कि इस बार माँ गज पर आ रही है! मां का गज पर आना शुभ माना जाता है क्योंकि सनातनी परंपरा और अनुष्ठान में गज का विशेष महत्व है! भगवान गणेश का मुख हाथी का सूंड है, शादी- विवाह के मौके पर भी हाथी का प्रतीक चिन्ह रखा जाता है! मां का गज पर आगमन से देश- दुनिया में खुशहाली रहेगी, सुख और समृद्धि का साम्राज्य रहेगा, इसलिए माँ का आगमन शुभ माना जा रहा है!

नवरात्र पर देवी की आराधना करने से दूर होते हैं कष्ट

आचार्य कौलेश्वर मिश्रा ने कहा कि शारदीय नवरात्र का महात्म्य वैदिक काल से है। मार्कंडेय पुराण में देवी का महात्म्य दुर्गा सप्तशती द्वारा प्रकट किया गया है। वहां वर्णित है कि शुंभ-निशुंभ व महिषासुर आदि तामसी प्रवृत्ति वाले असुरों का जन्म होने से देवता दुखी हो गए। सभी ने चित्त शक्ति से महामाया की स्तुति की। देवी ने वरदान दिया कि-डरो मत, मैं अचिरकाल में प्रकट हो कर इस असुर पराक्रमी असुरों का संहार करूंगी। आप देवों का दुख दूर करूंगी। मेरी प्रसन्नता के लिए आप लोगों को आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से घट स्थापन पूर्वक नवमी तक नौ दिन पूजा करनी चाहिए। इस आधार पर नवरात्र का महत्व अनादि काल से चला आ रहा है।

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