बड़़कागांव: मांझी हड़ाम के तत्वावधान में उरीमारी विस्थापित ग्रामीणों की बैठक रविवार को हुई। जिसकी अध्यक्षता कोलेश्वर मांझी ने किया।
बैठक में विस्थापित ग्रामीणों ने कहा कि हमलोग उरीमारी में खतियानी रैयत हैं। हमलोगों ने अपनी जमीन को सीसीएल प्रबंधन कोयला उत्खनन के लिए दिया हैं। इस जमीन से निकलने वाले कोयला से प्रबंधन करोड़ो रुपये मुनाफा कमा रही है। परन्तु हम ग्रामीणों को गांव के विकास कार्य के लिए या रोजगार के लिए कुछ नहीं दे रही है। दुसरी ओर रेलवे साईडिंग और सीएचपी साईलो के निर्माण कार्य से उरीमारी में रहने वाले ग्रामीणों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि खतियानी रैयत की समस्याओं को मांग पत्र के माध्यम से सीसीएल प्रबंधन को अवगत कराते हुए उन समस्याओं के समाधान की मांग किया जाएगा। जिसमें रेलवे साईडिंग एवं सीएचपी साईलो से हो रहे प्रदूषण को रोकने की व्यवस्था किया जाए, उरीमारी गांव में उत्खनन कार्य के कारण कुओं का जल स्तर काफी नीचे चला गया कुआं सूखने के कगार पर है। डीप बोरिंग कर पाईप लाईन के द्वारा पानी दिया जाए, उरीमारी बस्ती में सड़क का निर्माण किया जाए, उरीमारी बस्ती में तालाब का निर्माण किया जाए, 33,000 वोल्ट बिजली तार को घर के उपर से ना ले जाया जाए, बकाया जमीन के बदले नौकरी और मुआवजा दिया जाए, जिस रैयत का गैरमजरूआ जमीन है, सत्यापन कराकर नौकरी और मुआवजा दिया जाए।
बैठक में मुख्य रूप से राजू पावरिया, कौलेश्वर मांझी, संजय टूडू, महादेव बेसरा, कार्तिक मांझी, शिकारी टूडू, राजू हांसदा, तालो हांसदा, बसंत सोरेन, मोहन मांझी, बबलू मांझी, जयपाल मांझी, जितेंद्र हांसदा, विजय हांसदा सहित कई ग्रामीण मौजूद थे।