हजारीबाग: कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन एवं जनसेवा परिषद हजारीबाग के संयुक्त तत्वावधान में बाल विवाह, बाल मजदूर मुक्त भारत विषय पर कार्यशाला का आयोजन सोमवार को किया गया। कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी संजय प्रसाद एवं विशिष्ट अतिथि जन सेवा परिषद हजारीबाग के रामलाल प्रसाद उपस्थित थे।
कार्यशाला का विधिवत उद्घाटन जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी संजय प्रसाद एवं जन सेवा परिषद हजारीबाग के सचिव रामलाल प्रसाद के द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया मौके पर जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी संजय प्रसाद ने कहा कि बाल विवाह कानूनन अपराध है इस विवाह को कराने में शामिल हर एक व्यक्ति दोषी है जिस के सहयोग से बाल विवाह संपन्न कराया गया है जैसे हलवाई, टेंट वाला, लाइट वाला, साउंड वाला, पंडित, विवाह भोज में शामिल सभी ग्रामीण।
उन्होंने कहा कि लोगों को सही जानकारी नहीं होने के कारण वह बाल विवाह में शामिल होकर अपराध को बढ़ावा देते हैं। किसी विवाह में शामिल होने से पूर्व यह जरूर सुनिश्चित कर लें कि वहां बाल विवाह नहीं हो रहा हो और अगर बाल विवाह हो रहा हो तो इसकी जानकारी 1098 को जरूर दें।
इस दौरान जन सेवा परिषद, हजारीबाग के सचिव रामलाल प्रसाद ने कहा कि आज हमारे देश में बाल श्रम उन्मूलन के लिए कई प्रभावी नीतियां और कड़े कानून हैं। लेकिन जब तक इस बारे में लोगों के बीच जागरूकता नहीं होगी और पूरा समाज इसकी जिम्मेदारी लेकर अपना काम नहीं करेगा। तब तक यह एक चुनौती के रूप में बना रहेगा। हम सभी भारत को बाल श्रम मुक्त बनाने के साथ हर एक बच्चे को एक स्वस्थ, खुशहाल, सुरक्षित और आजाद बचपन देने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। हम इस प्रयास में निश्चित रूप से सफल होंगे।
उन्होंने बताया कि जन सेवा परिषद, हजारीबाग ने जिला प्रशासन और पुलिस की सहायता से 3 बाल मजदूरों को मुक्त करवाया। इनमें अधिकांश बच्चें झारखण्ड से हैं और इनकी उम्र 13 साल से लेकर 15 साल तक है। संस्था इस वर्ष जून महीने को बाल श्रम के खिलाफ एक्शन मंथ के रूप में मना रहा है। इसके तहत पूरे महीने बच्चों को बाल श्रम और दासता के चंगुल से मुक्त कराने के लिए छापामार कार्रवाई करते हुए बचाव अभियान चलाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की रिपोर्ट बाल श्रम वैश्विक अनुमान 2020, रूझान और आगे की राह के मुताबिक साल 2020 की शुरुआत में पूरी दुनिया में 16 करोड़ बच्चे बाल श्रम की चपेट में थे. इनमें 6.3 करोड़ लड़कियां और 9.7 करोड़ लड़के हैं. यानी दुनिया का हर 10 में से एक बच्चा मजदूरी करने पर मजबूर है। बाल श्रम को लेकर भारत में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है. साल 2011 की जनगणना के मुताबिक पूरे देश में पांच से 14 साल के बीच के मजदूरों की संख्या 1.10 करोड़ है. यह देश में बच्चों की कुल संख्या का 3.9 फीसदी हिस्सा है। कार्यशाला में बाल श्रम निषेध अधिनियम, बाल विवाह निषेध अधिनियम सहित कई अधिनियम की जानकारी दी गई।