रांची: मानहानि के मुकदमे में कोर्ट द्वारा दो साल की सजा मिलने के बाद शुक्रवार को कांग्रेसी नेता राहुल गांधी की लोकसभा की संसदीय सदस्यता रद्द कर दी गई।
लोकसभा सचिवालय ने शुक्रवार को अधिसूचना जारी कर वायनाड लोकसभा के सांसद राहुल गांधी को अयोग्य करार करते हुए सदस्यता रद्द कर दी है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 102 (1) और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 तहत यह कार्रवाई की गई है।
बताते चलें कि 2019 में राहुल गांधी ने कर्नाटक की एक चुनावी सभा में ‘मोदी सरनेम’ पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। जिसपर भाजपा के विधायक ने मुकदमा दर्ज कराया था। सूरत कोर्ट ने बीते 23 मार्च को राहुल गांधी को दो साल की सजा दी है। वहीं कोर्ट ने 30 दिनों के भीतर उपरी अदालत में अपील करने का समय देते हुए बेल दिया है।
वहीं राहुल गांधी की सदस्यता चले जाने के बाद देश में सियासत गर्म हो गई है। केंद्र के सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। वहीं झारखंड में भी राजनैतिक सरगर्मी बढ़ गई है।
सड़क से सदन तक करेंगे संघर्ष : राजेश ठाकुर
झारखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने इसे लोकतंत्र की हत्या बताते हुए कहा है कि चोर को चोर कहना अपराध हो गया है। भगोड़े,चोर और लुटेरे बेफिक्र घूम रहे हैं और इनके खिलाफ आवाज उठानेवाले को सजा मिल रही है। उन्होंने कहा कि हम न्यायालय का सम्मान करते हैं। हम राहुल गांधी के साथ हैं और सड़क से सदन तक संघर्ष करेंगे।
न्यायिक फैसले पर कांग्रेस का आचरण अशोभनीय: दीपक प्रकाश
झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने राहुल गांधी की सदस्यता रद्द होने के मामले प्रेस बयान जारी कर लोकसभा स्पीकर के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए बराबर है। फिर चाहे वह राजा हो या फिर रंक। कहा कि राहुल अमर्यादित भाषा बोलने के अभ्यस्त हो चुके हैं। 2019 में ‘मोदी सरनेम’ पर अमर्यादित टिप्पणी के बाद विधायक पूर्णेश मोदी ने मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें कोर्ट ने दो साल की सजा सुनाई है। न्यायिक फैसले के खिलाफ कांग्रेस का आचरण अशोभनीय है।