रांंची: झामुमो में आंतरिक कलह अब सतह पर आता दिख रहा है। जामा विधायक सह झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष शीबू सोरेन की बड़ी बहू सीता सोरेन ने झारखंड मुक्ति मोर्चा की सदस्यता और विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही उन्होंने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में भारतीय जनता पार्टी का दामन भी थाम लिया है। मुख्यालय में भाजपा नेता विनोद तावड़े ने उन्हें भाजपा की सदस्यता दिलाई। वहीं झारखंड प्रभारी लक्ष्मीकांत वाजपेई ने सीता सोरेन को भाजपा का पट्ट  और बुके देकर पार्टी में उनका स्वागत किया।

भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद सीता सोरेन ने मीडिया से कहा कि देश के विकास को लेकर प्रधानमंत्री मोदी जो प्रयास कर रहे हैं उसपर देशवासियों का विश्वास बढ़ रहा है। देश के विकास में अपना योगदान दे सकूं इसलिए मैं इस विशाल परिवार म़े शामिल हो रही हूँ। उन्होंने कहा कि ससुर शीबू सोरेन और पति दुर्गा सोरेन की अगुवाई में झारखंड अलग राज्य बना। दुर्गा सोरेन ने संगठन को मजबूत किया और जल, जंगल, जमीन की लड़ाई भी लड़ी। स्व. दुर्गा सोरेन ने झारखंड राज्य के लिए जो सपना देखा था वह 23 वर्ष बाद भी अधूरा है। देश का 40% खनिज संपदा झारखंड में होने के बावजूद लोग भटक रहे हैं, बाहर पलायन कर रहे हैं। झारखंड विकास से कोसों दूर है। जनता चाहती है कि अब विकास हो।

वहीं सुप्रीमो शीबू सोरेन को सौंपे गए इस्तीफे में सीता सोरेन हमेशा से उपेक्षित किए जाने की बात कही है। उन्होंने लिखा है कि उनके पति स्वर्गीय दुर्गा सोरेन ने त्याग और समर्पण के बल पर अपनी नेतृत्व क्षमता से पार्टी को बनाया था। आज पार्टी वैसे लोगों के हाथ में चली गई है, जिनके दृष्टिकोण और उद्देश्य उन आदर्शों से मेल नहीं खाते हैं।

चर्चा है कि झारखंड की राजनीति में स्व. दुर्गा सोरेन की पत्नी सीता सोरेन संगठन में अलग-थलग ही दिखती रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद चंपई सोरेन को सीएम बनाए जाने और सीता सोरेन को कैबिनेट में जगह नहीं मिलने के बाद से तल्खी और भी बढ़ गई। 

इधर, लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पहले कांग्रेस की सांसद गीता कोड़ा और अब झामुमो की विधायक सीता सोरेन के भाजपा में शामिल होने से इंडी गठबंधन को झारखंड में तगड़ा झटका लगता दिख रहा है। 

 

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