ऐतिहासिक धरोहर हैं भीम चू्ल्हा, शिव मंदिर के प्रांगण में हैं पांडवों की प्रतिमाएं
रिपोर्ट- पंकज कुमार
पलामू: झारखंड में कोयल नदी के तट पर महाभारत काल के साक्ष्य मिलते हैं। वनवास के दौरान पांडवों ने यहां दिन गुजारे थे। जिस विशालकाय चूल्हे पर पांडवों ने भोजन पकाया था, वह भीम चूल्हा के नाम से विख्यात है।

जिले के मोहम्मदगंज से लगभग दो किलोमीटर की दूर कोयल नदी के तट पर ऐतिहासिक धरोहर भीम चूल्हा है। यहां तीन विशालकाय चट्टानें चूल्हे को स्वरूप प्रदान करती हैं। पास ही चट्टानों पर विशालकाय पदचिन्ह दिखाई पड़ते हैं, जो पांडवों के बताए जाते हैं। मान्यता है कि वनवास के दौरान पांडव यहां पहुंचे थे। यहां उन्होंने भीम चूल्हा बनाकर उसपर भोजन पकाया था। भीम चू्ल्हा और पदचिन्हों को देखने देश के कोने-कोने से लोग यहां आते हैं।

शिव मंदिर के प्रांगण में स्थापित है पांडवों की प्रतिमा
भीम चूल्हा के पास ही भव्य शिव मंदिर है। जिसका निर्माण 70 के दशक में कराया गया था। प्रांगण में पांडवों की आदमकद प्रतिमाएं स्थापित हैं। मकरसंक्रांति और महाशिवरात्रि पर यहां मेले का आयोजन किया जाता है। जिसमें दूर-दराज के लोग मेले में पहुंचते है। पास ही पर्यटन के दृष्टिकोण से पार्क का निर्माण कराया है। टिकट लेकर पार्क का आनंद उठाया जा सकता है। वही कोयल नदी में लोग नौका विहार की भी अच्छी व्यवस्था है। हालांकि पर्यटन के दृष्टिकोण से क्षेत्र को अब भी विकसित करने की जरूरत है।
भीम चूल्हा के संबंध में स्थानीय लोग बताते हैं कि 1962 में कोयल नदी पर बराज बांध का निर्माण कराया जा रहा था। जिसके लिए कंस्ट्रक्शन कंपनी भीम चू्ल्हा के आसपास के पत्थरों का उठाव कर रही थी। इस दौरान कंपनी के कर्मचारियों के साथ अप्रत्याशित घटनाएं घटने लगी। बांध निर्माण का कम ठप पड़ गया। इसके बाद यहां के पत्थरों को वापस लाया गया और कंपनी की ओर से यहां छोटे शिव मंदिर का निर्माण कराया गया। जिसके बाद बराज बांध का काम शुरु हुआ और लगभग 10 वर्षों में बांध का निर्माण पूरा कर लिया गया। इस बीच भीम चूल्हा के प्रति लोगों की आस्था बढ़ती चली गई। स्थानीय लोगों ने आपसी सहयोग से शिव मंदिर को बड़ा स्वरूप भी दिया और पांडवों की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई।
कैसे पहुंचे भीम चूल्हा
पलामू जिले के मोहम्मदगंज स्टेशन से ऑटो या किराये के वाहन से यहां पहुंचा जा सकता है। गढ़वा से दूरी लगभग 33 किलोमीटर और डाल्टनगंज शहर से लगभग 59 किलोमीटर है। इन दोनों जगहों पर ठहरने की बेहतर व्यवस्था मिल सकती है। यहां से राजधानी रांंची से दूरी तकरीबन 231 किलोमीटर है।
यह रिपोर्ट जानकारी के उद्देश्य से लिखी गई है, किसी प्रकार के तथ्यों की पुष्टि खबरसेल नहीं करता है।
