रांची: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को राष्ट्रीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान, रांची के शताब्दी समारोह में भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रपति ने विधिवत दीप प्रज्ज्वलित कर की। अवसर पर सूबे के राज्यपाल संतोष गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की पावन धरती झारखंड मेरे लिए तीर्थ की तरह है। यहां से मेरा विशेष लगाव है। यहां के लोगों से मुझे काफी स्नेह मिलता है। वहीं राष्ट्रपति ने संस्थान के 100 वर्ष पर शुभकामनाएं देते हुए कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कृषि को लाभप्रद बनाने के साथ ही कृषि के आनेवाले चुनौतियों से निपटना भी है। सेकेंड्री एग्रीकल्चर की गतिविधियां इन चुनौतियों से निबटने में सहायक है। इसके तहत कृषि पर्यटन, मधुमक्खी पालन, मुर्गी पालन जैसे गतिविधियां भी शामिल हैं। इनके अपशिष्ट का उपयोग बेहतर कृषि के लिए किया जा सकता है। राष्ट्रपति ने कहा कि देश में लाख का उत्पादन मुख्य तौर पर जनजातिय समूह द्वारा किया जाता है। मुझे खुशी है कि संस्थान ने लाख, नैचुरल रेजिंग और गोंद के अनुसंधान और वाणिज्यक विकास के लिए कारगर कदम उठाए हैं। इससे जनजातीय समुदाय के भाई-बहनों का जीवन स्तर बेहतर हो सकेगा।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कृषि के क्षेत्र में विकास और किसानों की सहायता के लिए कई कदम उठा रही है। कृषि आधारित उद्योगों के विकास, पैक्स और एफपीओ संगठनों का विस्तार और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में प्रयास निरंतर किए जा रहे हैं। 

 

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