रैयत विस्थापित मोर्चा ने सीसीएल प्रबंधन के खिलाफ किया विरोध प्रदर्शन

• घर मापी के लिए वंशावली मांगे जाने पर जताई नाराजगी

बड़कागांव: पोटंगा पंचायत अंतर्गत रसकाटोला के ग्रामीणों की बैठक शुक्रवार को हुई। जिसकी अध्यक्षता रैयत विस्थापित मोर्चा उरीमारी शाखा के अध्यक्ष जूरा सोरेन एवं संचालन विजय सोरेन ने किया। बैठक में सीसीएल प्रबंधन द्वारा घर मापी हेतु वंशावली मांगें जाने का पुरजोर विरोध किया गया। ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि सीसीएल प्रबंधन के द्वारा घर मापी करने से पूर्व वंशावली की मांग करना सरासर गलत है। इससे पहले भी कई आवास हो यहां से हटाया गया है जिसमें वंशावली की मांग नहीं की गई थी। फिर अचानक से सीसीएल प्रबंधन वंशावली की मांग कर हम ग्रामीणों को सिर्फ कागजी कार्यवाहियों में उलझाना चाह रही है। सीसीएल प्रबंधन को जब जमीन की जरूरत होती है तो मीठी-मीठी बातों से रैयत ग्रामीणों को अपनी ओर मिला लेते है और यही रैयत ग्रामीण जब विस्थापित हो जाते हैं तो सीसीएल प्रबंधन का व्यवहार बदल जाता है। ऐसे में हम अपनी पहचान ही मिटाते जा रहे हैं और सीसीएल प्रबंधन हमारी जमीनों से कोयला निकालकर करोड़ों रुपया मुनाफा कमा रही है।

इस संबंध में ग्रामीणों ने अंचलाधिकारी बड़कागांव को एक पत्र सौंपा है। जिसमें कहा गया है कि सीसीएल प्रबंधन के द्वारा घर मापी हेतु जबरन वंशावली बनाने हेतु हम ग्रामीणों को दबाव दिया जा रहा है जबकि इससे पूर्व में जिन ग्रामीणों को घर खाली करवाया गया उस समय ग्रामीणों से किसी प्रकार का कोई वंशावली की मांग नहीं किया गया था। सीसीएल प्रबंधन की इस दोहरी नीति का हम सभी ग्रामीण पुरजोर विरोध करते हैं। इसके पूर्व में हम सभी ग्रामीण रैयत घर मापी हेतु वंशावली बनाने का विरोध रैयत विस्थापित मोर्चा के बैनर तले कर चुके हैं। हमारी जमीन न्यू बिरसा परियोजना एवं उरीमारी परियोजना में कोयला खनन हेतु अधिकृत किया जा चुका है। जिसके बदले कुछेक रैयतों को नौकरी और मुआवजा दिया गया है। 45-50 वर्षों से भारत सरकार ने हमारी जमीन अधिग्रहण किया हुआ है एवं अभी तक यहां के रैयतों का बकाया नौकरी और मुआवजा कंपनी के प्रावधान के तहत नहीं मिला है। हम आदिवासी रैयत परिवार जीवन यापन के लिए दूसरों पर आश्रित रहते हैं। यहां के अधिकतर ग्रामीण रैयत जीवन यापन के लिए दूसरे राज्य के ईट भट्टों पर मजदूरी कर रहे हैं। हम सभी ग्रामीण रैयत मूलतः आदिवासी समाज से हैं। सीसीएल प्रबंधन के द्वारा हम आदिवासी ग्रामीण परिवारों को जबरन वंशावली बनवाकर घर मापी करने का प्रयास किया जा रहा है जो कहीं से न्याय संगत नहीं है।

पत्र के अंत में कहा गया है कि उपरोक्त विषय अति संवेदनशील है। जिसे उचित कार्रवाई करते हुए हम आदिवासी परिवारों का उचित हक अधिकार दिलाने एवं जान माल की सुरक्षा प्रदान करने की कृपा करें ताकि हम आदिवासी परिवारों का धन और धर्म की रक्षा हो सके।

बैठक में मुख्य रूप से गुप्ता कुमार सोरेन, राजू सोरेन, राजेंद्र सोरेन, अमित मरांडी, मोहित सोरेन, नेहा कुमारी, नरेश सोरेन, लुदवा मांझी, शांति देवी, नागेंद्र टुडू, किरण देवी, कंदनी देवी, सरजू सोरेन, दकलू टुडू, मठु टुडू, जतरू मांझी, मुंशी मांझी, मनीराम मरांडी, सुनीता देवी, टेमने देवी, मंझली देवी, कर्मी देवी, कमलेश सोरेन, बुधना हेंब्रम, सिकेंद्र सोरेन, लोखना टुडू सहित कई लोग मौजूद थे।

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