भव्य आतिशबाजी, लेजर शो और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे आकर्षण; सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर रहेगा विशेष जोर

 रांची: मोरहाबादी मैदान में इस वर्ष दशहरा के अवसर पर भव्य रावण दहन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके लिए 70 फीट ऊंचा रावण, 65 फीट का कुंभकर्ण और 60 फीट का मेघनाथ का पुतला तैयार किया जाएगा। इसके अलावा 30×30 फीट की दो मंजिला सोने की लंका भी बनाई जाएगी। भव्य आकाशीय आतिशबाजी, विशेष लेजर शो, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, भांगड़ा नृत्य और रावण वध की जीवंत झांकी आयोजन के प्रमुख आकर्षण होंगे।

पंजाबी हिंदू बिरादरी की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रावण के पुतले का दहन करेंगे। केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ कुंभकर्ण और रांची के विधायक सीपी सिंह मेघनाथ के पुतले का दहन करेंगे।

सांस्कृतिक कार्यक्रम और आतिशबाजी रहेंगी खास

कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों के साथ धनबाद की विक्की छाबड़ा टीम सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देगी। श्रीराम दरबार, भगवान राम की जीवंत मूर्ति और रावण वध की जीवंत झांकी भी प्रस्तुत की जाएगी। टाटा की सन्नी ग्रुप टीम भांगड़ा नृत्य पेश करेगी। वहीं, कोलकाता की टीम आकाशीय आतिशबाजी और बिहार के बक्सर जिले से आए आतिशबाज जमीन पर आतिशबाजी करेंगे। विशेष लेजर शो भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहेगा।

सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर रहेगा विशेष ध्यान

बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए कार्यक्रम में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था महत्वपूर्ण रहेगी। भीड़ की आवाजाही सुचारु बनाए रखने, प्रवेश और निकास मार्गों को व्यवस्थित रखने तथा आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए संबंधित व्यवस्थाओं पर जोर रहेगा। आतिशबाजी और पुतला दहन के दौरान दर्शकों की सुरक्षित दूरी सुनिश्चित करना भी अहम होगा। लोगों से अपील रहेगी कि वे प्रशासन और आयोजन समिति के निर्देशों का पालन करें तथा निर्धारित रास्तों का ही उपयोग करें।

कार्यक्रम के दौरान राज अस्पताल और पंजाबी हिंदू बिरादरी की ओर से एंबुलेंस की व्यवस्था की जाएगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति में चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

1948 में हुई थी रावण दहन की शुरुआत

रांची में रावण दहन की परंपरा वर्ष 1948 में शुरू हुई थी। उस समय रांची कॉलेज के पास महात्मा गांधी मार्ग स्थित डाकघर के सामने परिसर में 12 फीट ऊंचा रावण का पुतला बनाया गया था। वर्ष 1950 से 1955 के बीच पुतलों का निर्माण रेलवे स्टेशन के पास खजुरिया तालाब स्थित शरणार्थी शिविर में होने लगा। इस दौरान रावण दहन बारी पार्क में किया जाता था, जहां अब टाउन हॉल स्थित है।

बाद में पंजाबी हिंदू बिरादरी के सदस्यों ने डोरंडा स्थित राम मंदिर में पुतलों का निर्माण शुरू किया। आयोजन में बढ़ती भीड़ को देखते हुए वर्ष 1960 से मोरहाबादी मैदान को रावण दहन के लिए चुना गया। समय के साथ पुतलों की ऊंचाई और आयोजन की भव्यता बढ़ती गई। आज मोरहाबादी मैदान का रावण दहन रांची के प्रमुख दशहरा आयोजनों में शामिल है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं।