स्थानीयता और ओबीसी आरक्षण पर राज्य सरकार का निर्णय विधि सम्मत नहीं : भाजपा

रांची : झारखंड केबिनेट द्वारा 1932 के खतियान आधारित नियोजन नीति और ओबीसी आरक्षण का प्रस्ताव पारित करने के बाद राजनैतिक सरगर्मी बढ़ती दिख रही है। बृहस्पतिवार को रात 9:30 बजे भारतीय जनता पार्टी झारखंड प्रदेश की ओर से प्रेसवार्ता की गई। जिसमें केबिनेट के फैसले पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने पार्टी रूख साफ किया। प्रेसवार्ता में पूर्व मुख्यमंत्री सह भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी और केंंद्रीय राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी मौजूद रहीं। 

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आज प्रदेश भाजपा के वरीष्ठ नेताओं की एक बैठक हुई। जिसमें झारखंड केबिनेट में लिये गये निर्णयों पर सूक्ष्म दृष्टिकोण से गहनता पूर्वक विचार किया गया। जिसके बाद पार्टी के विचारों को रखने का निर्णय लिया गया। भाजपा कमजोर और पिछड़ा वर्ग के आरक्षण की हिमायती रही है।
झारखंड राज्य गठन के बाद भाजपा की सरकार ने आदिवासियों को 32 प्रतिशत, अनुसूचित जाति को 14 प्रतिशत और ओबीसी को 27 प्रतिशत कुल 73 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया था। जिसे उच्च न्यायालय ने निरस्त कर दिया था। राज्य में भाजपा की सरकार ने ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण को विधि-सम्मत बनाने हेतू सर्वेक्षण का निर्णय लिया था, किंतु हेमंत सरकार ने उस सर्वेक्षण कार्य को बंद कर दिया। ताकि समाज को इस आरक्षण का विधि सम्मत लाभ न मिल सके। वर्तमान सरकार द्वारा आरक्षण का लिया गया निर्णय विधि सम्मत और संवैधानिक ढांचे में नहीं है। पिछड़े वर्ग को कमजोर करने के लिए हेमंत सरकार ने प्रक्रिया विहीन प्रावधान किया है जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और इस कार्य में सरकार में शामिल  कांग्रेस और राजद भी बराबर दोषी है। कहा कि ऐसे समय में हम राज्य की जनता से अपील करते हैं कि सरकार के द्वारा भ्रामक तथ्यों के आधार पर जो विद्वेष का बीज बोया जा रहा है इसके लिए जनता को सावधान रहने की जरूरत है। लोगों से शांति और सौहार्द बनाये रखने की अपील है।
वहीं केबिनेट में पारित स्थानीय नियोजन नीति पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राज्य गठन के साथ ही भाजपा की पहली सरकार ने स्थानीयता और नियोजन नीति को परिभाषित करने हेतु पहल प्रांरभ कर दिया गया। तब सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई और सर्वसम्मत निर्णय के आधार पर स्थानीयता को परिभाषित करते हुए पिछले सर्वे (राईट्स ऑफ रिकॉर्ड) में जिनके पूर्वजो का नाम दर्ज हो उन्हें स्थानीय मानते हुए जिला स्तर पर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी में नियुक्ति देने में प्राथमिकता का निर्णय लिया, परंतु उच्च न्यायालय ने इसको निरस्त कर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी जन भावनाओं का सम्मान करते हुए विधि सम्मत और सर्व सम्मत निर्णय की पक्षधर है। हम ऐसे सभी निर्णय के पक्षधर है जो झारखंड की समस्त जनता के हित में हो। वर्तमान सरकार द्वारा निर्धारित आधार अपूर्ण है।  सरकार द्वारा स्थानीय नीति को नियोजन नीति ने नहीं जोड़ना समझ से परे है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह निर्णय आननफानन में लिया गया है। जो न विधि सम्मत है और न सर्वसम्मत है।

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