रांची: झारखंड में डॉक्टरों के आंदोलन का दायरा सरकारी अस्पतालों से आगे निजी स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचने वाला है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और झारखंड राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ (JHASA) ने ऐलान किया है कि लंबित मांगों पर सरकार ने कार्रवाई नहीं की तो 22 अक्टूबर से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के साथ निजी अस्पताल, नर्सिंग होम और क्लीनिक की इमरजेंसी सेवाएं भी बंद कर दी जाएंगी।
इससे पहले डॉक्टर चरणबद्ध तरीके से सरकार पर दबाव बनाएंगे। जागरूकता कार्यक्रम, काला बिल्ला लगाकर विरोध और अन्य आंदोलनात्मक कार्यक्रमों के जरिए सरकार को मांगों पर निर्णय लेने का मौका दिया जाएगा। संयुक्त बैठक में डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि वे कार्य बहिष्कार के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन लंबे समय से लंबित मुद्दों का समाधान नहीं होने पर यह कदम उठाना पड़ रहा है।
IMA के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. धन्वंतरी तिवारी ने कहा कि सरकारी डॉक्टरों के DACP, मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट और क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में बदलाव समेत कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं। उनके अनुसार, आश्वासन के बावजूद समाधान नहीं होने पर आंदोलन को व्यापक करने का फैसला लिया गया है।
झारखंड IMA अध्यक्ष डॉ. ए.के. सिंह ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को IMA के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से भेजा गया पत्र भी सार्वजनिक किया। डॉक्टरों ने कहा कि मरीजों की सेवा उनकी प्राथमिकता रही है, लेकिन लंबित मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से चरणबद्ध आंदोलन के अलावा विकल्प नहीं बचा है।
डॉक्टरों की प्रमुख मांगों में सरकारी चिकित्सकों के लिए DACP, मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट, अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में सुरक्षा, 50 बेड तक के निजी अस्पतालों व क्लीनिकों को क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट से बाहर करना, जूनियर डॉक्टरों को समय पर स्टाइपेंड और मातृत्व अवकाश शामिल हैं।
इसके अलावा आयुष्मान भारत के पैकेज रेट में सुधार, डॉक्टरों के इंसेंटिव व निजी अस्पतालों के भुगतान में तेजी और लाइसेंस समेत अन्य मंजूरियों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने की मांग की गई है। संयुक्त बैठक में डॉ. प्रदीप सिंह, डॉ. अजीत कुमार, डॉ. एस. प्रसाद, डॉ. बिमलेश कुमार सिंह, डॉ. आरके सिंह, डॉ. मृत्युंजय सिंह, डॉ. पंकज समेत IMA और झासा के कई प्रतिनिधि मौजूद रहे।
