प्लास्टिक की छत और साड़ी की चहारदीवारी बनाकर रह रहा गरीब परिवार

उप प्रमुख ने की मुलाकात, मदद का भरोसा दिलाया

● बीते वर्ष ढह गया खपरैल घर

संजय राम

बारियातू (लातेहार) : प्लास्टिक की छत और साड़ी की दिवार बनाकर एक महिला अपने बच्चों को सुरक्षित रखने की जद्दोजहद में एक वर्ष से लगी हो, तो समझा जा सकता है कि सूबे में सरकारी योजनाओं का हाल क्या है और जनता के रहनुमाओं में अब कितनी संवेदना बची है। बारियातू प्रखंड स्थित मतकोमा गांव के बारीबांध निवासी फुलमनी देवी, पति कलेसर लोहरा बताती हैं कि पुराना खपरैल घर लगभग एक साल पहले ध्वस्त हो गया।  पैसे के अभाव में तब से प्लास्टिक का छत और साड़ी-चादर का घेरा बनाकर रह रही है। परिवार में पति-पत्नी के अलावा दो बच्चे लक्ष्मी कुमारी और अमन कुमार हैं। जो इसी हाल में गर्मी, जाड़ा बरसात की मार झेलते आ रहे हैं। फुलमनी बताती है कि पति बाहर मजदूरी करते हैं। पैसे की तंगी है। बरसात के मौसम में राज जागकर गुजारना पड़ता है। सांप-बिच्छू का भय बना रहता है। बताया कि ससुराल से हिस्से में मिला घर भी पूरी तरह से जर्जर है और रहने योग्य नहीं है।

पुराना जर्जर घर दिखाती फुलमनी

प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका है। वहीं मामले की जानकारी पर प्रखंड उपप्रमुख सह पंसस निशा शाहदेव ने स्थिति का जायजा लेते हुए फुलमनी को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। निशा शाहदेव ने कहा कि प्रखंड और जिला के अधिकारियों से मिलकर प्रधानमंत्री आवास दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

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