रांची: मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और ‘लहरा दो तिरंगा’ अभियान के समर्थन में शनिवार को रांची में विभिन्न छात्र एवं सामाजिक संगठनों ने कॉन्फ्रेंस की। संगठनों ने नई दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चिंता जताई। साथ ही झारखंड में संयुक्त विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की तैयारी की बात कही।

संयुक्त बयान में संगठनों ने निर्वाचन आयोग की जवाबदेही, मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया और शांतिपूर्ण विरोध के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े सवाल उठाए। उन्होंने नई दिल्ली में प्रदर्शन स्थल बदले जाने, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार की आलोचना की। वक्ताओं ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि असहमति व्यक्त करने और शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराने के अधिकार का सम्मान होना चाहिए।

बयान में SIR की प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए। भारत जोड़ो अभियान के राज्य संयोजक प्रवीर पीटर ने मौजूदा स्थिति को ‘अघोषित आपातकाल’ बताते हुए आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम कर रहा है।
संगठनों ने कहा कि आने वाले दिनों में आपसी समन्वय से झारखंड में संयुक्त विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इसके जरिए छात्र-युवाओं और आम लोगों के बीच निर्वाचन आयोग की जवाबदेही, पुलिस कार्रवाई और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए जाएंगे। ‘लहरा दो तिरंगा’ अभियान के समर्थन में मेलबर्न स्थित विक्टोरिया संसद के बाहर प्रस्तावित प्रदर्शन का भी उल्लेख किया गया।

कॉन्फ्रेंस में CJP की रांची नेता सृष्टि एक्का और कायनात अंजुम, AISA की झारखंड राज्य सह सचिव संजना मेहता, AISF के रांची जिला अध्यक्ष एहतेशाम प्रवीण, AIPWA की राज्य संयोजक नंदिता भट्टाचार्य तथा झारखंड जनाधिकार महासभा के कार्यकर्ता और भारत जोड़ो अभियान के राज्य संयोजक प्रवीर पीटर मौजूद रहे।

