राज्य सरकार खनिज संपदा की लूट कर बांट रही झूठ की रेवड़ी : रघुवर दास

भाजपा प्रदेश कार्यालय में पूर्व मुख्यमंत्री ने की प्रेसवार्ता

रांची : विगत ढाई वर्षों में ये परिवारवाद गठबंधन की सरकार ने कोयला, बालू, गिट्टी, शराब का व्यापार और ट्रांसफर पोस्टिंग में हजारों करोड़ की उगाही की है। यहां तक की मुख्यमंत्री ने अपने और अपने परिवारवालों के नाम माईनिंग लीज भी लिया। जिसके परिणामस्वरूप मुख्यमंत्री जैसे प्रतिष्ठित पद वाले, उनके परिवार वाले और उनके सहयोगी आज केंद्रीय एजेंसियों के रडार पर हैं। अब जनता को भ्रमित करने के लिए सरकार 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति और ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा कर झूठ की रेवड़ी बांट रही है। जबकि मुख्यमंत्री जानते हैं और खुद भी विधानसभा में कह चुके हैं कि यह संभव नहीं है। यह बातें राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री सह भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास ने शुक्रवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में कही। उन्होंने प्रेसवार्ता की शुरूआत करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने चुनाव से पूर्व घोषणा किया था कि हम पांच लाख लोगों को सरकारी नौकरी देंगे। ग्रेजुएट बेरोजगार को पांच हजार और पोस्ट ग्रेजुएट बेरोजगार को सात हजार रूपये भत्ता देंगे। गरीब बहन को 2000 रूपया चूल्हा खर्चा और 2500 रुपया दिव्यांग, वृद्धा, विधवा को देंगे। तीन वर्ष होने को है और इन वादों को पूरा नहीं करने पर जनता में आक्रोश है। साथ ही इन्होंने जो जल, जंगल, जमीन और यहां की खनिज संपदा को लूटा है वो मीडिया के माध्यम से सामने आते रहे हैं। इधर जांच एजेंसी ईडी के द्वारा जो चार्जशीट पेश की गई है, उसमें सिर्फ एक ही जिले से 1400 से 1500 करोड़ के अवैध उत्खनन की बात सामने आई है। इस मामले में ईडी के प्रेसनोट में मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि का नाम सबसे आगे है। जो खनन का पैसा राज्य की जनता के खाते में आना चाहिए था, यहां के आदिवासी-मूलवासी के विकास में जो पैसे खर्च होने चाहिए थे, आज एक परिवार के खाते में ये रुपये जा रहे हैं। रघुवर दास ने सरकार पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि एक जिले में 1400 से 1500 करोड़ है। 12 जिले ऐसे हैं जहां 20 हजार करोड़ से ज्यादा का अवैध कोयला, बालू और पत्थर का अवैध खनन हुआ है। इससे झारखंड की जनता काफी आक्रोश में है। इसी आक्रोश को डायवर्ट करने के लिए बयानवीर मुख्यमंत्री रोज नये नये घोषणा कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री भी जानते हैं विधि सम्मत नहीं है स्थानीय नीति : रघुवर दास

 1932 की स्थानीय नीति की घोषणा कर यहां की जनता के साथ फ्रॉड किया जा रहा है। राज्य बनने के बाद बनाये गये स्थानीय नीति को परिभाषित करनेवाले संकल्पों को माननीय उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने गलत बताया था तथा इसे लेकर महत्वपूर्ण सुझाव भी दिये थे। इसके बाद राज्य में सरकारें बनी, कमेटियां बनी लेकिन स्थानीयता को परिभाषित नहीं किया जा सका। मामला विचाराधीन रहा। हमारी सरकार बनने के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई गई, सामाजिक संगठनों और राज्य के बुद्धिजीवियों से विचार विमर्श कर नियोजन नीति से जोड़कर बड़ी संख्या में राज्य के बेटे-बेटियों को नियुक्ति से जोड़ा गया। यह मुख्यमंत्री को भी पता है जिस स्थानीय नीति की वह घोषणा कर रहे हैं वह उच्च न्यायालय की अवमानना है और यह लागू हो ही नहीं सकता। 23 मार्च 2022 को यह बात मुख्यमंत्री ने विधानसभा में स्वयं ही कहा है। मुख्यमंत्री जानते हैं कि नौवीं अनुसूची में इस शामिल नहीं किया जा सकता क्योंकि यह विधि सम्मत नहीं है। सरकार लोगों को स्थानीय नीति के मामले से उलझाने, लटकाने और भटाकाने की नीयत से काम कर रही है।

आरक्षण में भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया : रघुवर दास

मुख्यमंत्री ने आरक्षण की जो घोषणा की है विधि सम्मत नहीं है। यह भी संभव प्रतीत नहीं होता है। माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार उस श्रेणी के लिए स्पेसिफिक ग्राउंड आपको देना होगा। भाजपा पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की पक्षधर रही है। इसके लिए हमारी सरकार ने राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों को सर्वेक्षण का निर्देश दिया था। सरकार बताये कि रिपोर्ट आई है या नहीं। अगर रिपोर्ट नहीं आई है तो आरक्षण तय करने में कौन कौन से कारक का ध्यान रखा गया है। आरक्षण देने के लिए जिस प्रक्रिया की आवश्यकता होती है उसका पालन भी नहीं किया गया है। निर्धारित प्रक्रिया को पूरा किये बिना प्रजातंत्र में फैसला नहीं लेना होता है। यह लोकतंत्र है, राजतंत्र नहीं है।

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