रांची: जनवादी लेखक संघ की ओर से शनिवार को रांची प्रेस क्लब में लेखक सुधीर पाल की तीन पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर आयोजित परिचर्चा में वक्ताओं ने पेसा कानून, पांचवीं अनुसूची, आदिवासी स्वशासन और झारखंड में आदिवासी अधिकारों से जुड़े सवालों पर विचार रखे।

राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने कहा कि पांचवीं अनुसूची आदिवासियों और मूलवासियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। इसे ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सामाजिक न्याय के संदर्भ में समझने की जरूरत है।

‘झारखंड में पेसा: परंपरा, पंचायत और जवाबदेही’ पर चर्चा करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता दयामनी बारला और रामचंद्र उरांव ने ग्रामसभा की भूमिका तथा सामुदायिक स्वशासन के महत्व को रेखांकित किया।

‘पांचवीं अनुसूची: परंपराओं का गणराज्य’ पर वरिष्ठ अधिवक्ता रश्मि कात्यायन और साहित्यकार रणेंद्र ने संवैधानिक प्रावधानों और आदिवासी हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। इतिहासकार डॉ. एलएन राणा और डॉ. जेपी गुप्ता ने कहा कि ऐसी पुस्तकें झारखंड के इतिहास और आदिवासी समाज को समझने में मददगार हैं।

वहीं, ‘आंतरिक उपनिवेश और आदिवासी प्रश्न’ पर साहित्यकार महादेव टोप्पो और शिक्षाविद डॉ. मिथिलेश ने विचार रखे। महादेव टोप्पो ने सरकारी कामकाज में क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को महत्व देने की जरूरत बताई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि कुमार बृजेन्द्र ने की। इसके बाद आयोजित कवि गोष्ठी में डॉ. अशरफ अली, प्रियंका उरांव, यासमीन लाल, सत्यनारायण मुंडा, सलोन उरांव, दिव्या मुर्मू, रीता सोरेन, महावीर उरांव, मनीषा बोदरा और शिवशंकर उरांव ने कविता पाठ किया। विभिन्न सत्रों का संचालन आलम आरा, डॉ. अशरफ, यासमीन लाल, विक्की मिंज और सुकेशी कर्मकार ने किया। आयोजन में एमजेड खान सहित जनवादी लेखक संघ के अन्य सदस्यों की भूमिका रही।