कभी नहीं बुझ सकती क्रांति की चिंगारी : मुख्यमंत्री
रिपोर्ट – एस. अंसारी
रांची: हूल दिवस के अवसर पर मंगलवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन ने रांची के मोरहाबादी स्थित सिदो-कान्हू उद्यान पहुंचकर वीर शहीदों को नमन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री और विधायक ने हूल विद्रोह के महानायक अमर शहीद सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस दौरान दोनों ने शहीदों के बलिदान को याद करते हुए झारखंड आंदोलन में उनके योगदान को याद किया। अवसर पर बड़ी संख्या में लोग सिदो-कान्हू उद्यान पहुंचे और शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
वहीं मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने मौजूद जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड के वीर सपूतों की शौर्य गाथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि क्रांति की आग कभी बुझाई नहीं जा सकती। सिदो-कान्हू और हूल के वीरों ने जो मशाल जलाई थी, वह आज भी हमें अन्याय के खिलाफ लड़ने की ताकत देती है।
बताते चलें कि 30 जून 1855 को संथाल परगना में ब्रिटिश हुकूमत और जमींदारों के शोषण के खिलाफ सिदो-कान्हू के नेतृत्व में हूल विद्रोह शुरू हुआ था। इस दिन को झारखंड में शहादत दिवस के रूप में मनाया जाता है।
लोक भवन में राज्यपाल ने दी श्रद्धांजलि
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मंगलवार ‘हूल दिवस’ के अवसर पर लोक भवन में हूल क्रांति के अमर महानायक सिदो-कान्हू के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि हूल क्रांति भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का एक गौरवशाली अध्याय है। सिदो-कान्हू, चाँद-भैरव, फूलो-झानो सहित हूल आंदोलन के सभी वीर सेनानियों ने अन्याय, शोषण एवं औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध अदम्य साहस का परिचय दिया। उनका त्याग, संघर्ष और राष्ट्रप्रेम सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।
