रांची: कांके प्रखंड के ओयना स्थित जामिया उस्मानिया में गुरुवार को दूसरी आलीशान दस्तारबंदी एवं दीनी तालीमी जलसे का आयोजन किया गया। ईशा की नमाज के बाद आयोजित इस कार्यक्रम में हिफ्ज-ए-कुरआन की शिक्षा पूरी करने वाले 31 विद्यार्थियों की दस्तारबंदी की गई। कुरआन-ए-करीम को कंठस्थ कर हाफिज-ए-कुरआन बनने वाले इन विद्यार्थियों को उलमा-ए-किराम और विशिष्ट अतिथियों के हाथों दस्तार पहनाकर सम्मानित किया गया।
जलसे में मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्थानीय गणमान्य लोग
जलसे में मुख्य अतिथि के रूप में दारुल उलूम नदवतुल उलमा, लखनऊ के शैखुत तफसीर मौलाना सैयद सुहैब हुसैनी नदवी तथा दारुल उलूम वक्फ, देवबंद के उस्ताद-ए-हदीस मौलाना फरीदुद्दीन कासमी शामिल हुए। इनके अलावा शायर-ए-इस्लाम असद आजमी और जामिया उस्मानिया के संरक्षक-ए-आला कारी सुहैब अहमद नोमानी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
अपने संबोधन में वक्ताओं ने कुरआन-ए-करीम की तालीम, हिफ्ज की अहमियत और नई पीढ़ी की इस्लामी एवं नैतिक तरबियत पर प्रकाश डाला। उन्होंने दीनी शिक्षा के प्रसार में मदरसों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। विद्यार्थियों को कुरआन की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने और उसके संदेश को समाज तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया।

हिफ्ज, नाजिरा और तजवीद की दी जाती है तालीम
जामिया उस्मानिया, ओयना में मुख्य रूप से हिफ्ज-ए-कुरआन, नाजिरा, तजवीद, किरात और अन्य दीनी तालीम की व्यवस्था है। संस्था के मोहतमिम मौलाना मुजफ्फर हुसैन इरफानी, संरक्षक-ए-आला कारी सुहैब अहमद नोमानी और नाजिम-ए-तालीमात मौलाना खालिद सैफुल्लाह नदवी हैं। संस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को धार्मिक शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों और अच्छे संस्कारों से जोड़ना है।
31 विद्यार्थियों की सामूहिक दस्तारबंदी रही मुख्य आकर्षण
जलसे का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 31 विद्यार्थियों की सामूहिक दस्तारबंदी रही। हिफ्ज-ए-कुरआन का पाठ्यक्रम पूरा कर हाफिज-ए-कुरआन बने विद्यार्थियों को दस्तार पहनाकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए उलमा, मशाइख, हाफिज, कारी और इमाम के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्थानीय गणमान्य लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम में ओयना कमेटी सहित चुट्टू, नेवरी और चंदवे की कमेटियों के पदाधिकारियों एवं गणमान्य लोगों की भागीदारी रही।

जलसे का उद्देश्य हिफ्ज पूरा करने वाले विद्यार्थियों की हौसला अफजाई करना, दीनी तालीम को बढ़ावा देना और समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करना था। जामिया के जिम्मेदारों ने संस्था की शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर बनाने, विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण दीनी शिक्षा उपलब्ध कराने और भविष्य में शैक्षणिक दायरे को विस्तृत करने का संकल्प व्यक्त किया।
जामिया उस्मानिया में आयोजित इस दूसरे दस्तारबंदी जलसे ने क्षेत्र में धार्मिक शिक्षा के महत्व और नई पीढ़ी को कुरआन-ए-करीम की तालीम से जोड़ने का संदेश दिया।

