रांची: विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के गैर-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के लंबित मामलों को अब राज्यस्तरीय स्तर पर उठाया जाएगा। झारखंड विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ को झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ की विधिवत संबद्धता मिलने के बाद रविवार को दोनों संगठनों ने संयुक्त रूप से आगे की रणनीति रखी।
प्रेसवार्ता में विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के महामंत्री विश्वम्भर यादव, अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के महामंत्री बीरेंद्र कुमार और प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र नाथ ठाकुर ने कहा कि कर्मचारियों के वैधानिक अधिकार और पारदर्शी प्रशासन संगठन की प्राथमिकता होंगे। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि नियमसम्मत व्यवस्था के लिए आवाज उठाई जाएगी।
संगठनों ने विश्वविद्यालयों में गैर-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति शुरू करने की मांग की। लंबित एसीपी, एमएसीपी और पदोन्नति मामलों के निपटारे के साथ पुनर्संरचित पदों पर योग्य कर्मचारियों के समायोजन की मांग भी रखी गई। पूर्ववर्ती इंटरमीडिएट सेक्शन में वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों के समायोजन का मुद्दा भी उठाया गया।
संविदा कर्मियों के लिए वेतन पुनरीक्षण और वार्षिक वृद्धि की पारदर्शी व्यवस्था बनाने की मांग की गई। आउटसोर्स कर्मचारियों को निर्धारित मैन-मंथ रेट के अनुसार वेतन, ईपीएफ, ईएसआईसी, बोनस, अवकाश और अन्य वैधानिक लाभ देने पर जोर दिया गया। तीन वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत योग्य कर्मियों के लिए नियमसम्मत स्थायी नियुक्ति की नीति बनाने की मांग भी रखी गई।
प्रेसवार्ता में विश्वविद्यालयों में सार्वजनिक धन से होने वाली बड़ी खरीद को लेकर भी पारदर्शिता की मांग उठी। संगठनों ने आवश्यकता आधारित खरीद और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
