| खाद्य सुरक्षा परामर्श समिति की बैठक में उपायुक्त ने दिए निर्देश |
रामगढ़: जिले में मिलावटी खाद्य पदार्थों को लेकर जिला प्रशासन अब सख्त कदम उठाने जा रही है। खासकर बाजार में धड़ल्ले से बिक रहे मिलावटी पनीर और दूध से बने उत्पादों पर नकेल कसने की तैयारी शुरू हो गई है।इसे लेकर समाहरणालय सभाकक्ष में उपायुक्त ऋतुराज की अध्यक्षता में जिला स्तरीय खाद्य सुरक्षा परामर्शी समिति की बैठक हुई। बैठक में पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार लुनायत सहित खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
उपायुक्त ने कहा – शुद्ध भोजन जनता का अधिकार
बैठक में उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि आम लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना प्रशासन की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मिलावटी भोजन से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है, इसलिए इस पर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जिला खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया कि जिले में निरीक्षण, लाइसेंसिंग, पंजीयन और नमूना संग्रहण की प्रक्रिया में और तेजी लाई जाए।
पनीर और खोआ पर रहेगा विशेष फोकस
त्योहारों के सीजन में पनीर और खोआ की मांग बढ़ जाती है और इसी का फायदा उठाकर मिलावटखोर सिंथेटिक पनीर बाजार में खपा देते हैं। इसे देखते हुए उपायुक्त ने विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। अधिकारी बाजार, होटल, मिठाई दुकानों और सप्लाई चेन से पनीर के सैंपल लेंगे और संदेह होने पर उसे जांच के लिए लैब भेजेंगे। रिपोर्ट में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित दुकानदार पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई होगी।
बिना लाइसेंस चल रही 100 से ज्यादा दुकानों पर नजर
बैठक में बताया गया कि जिले में बड़ी संख्या में खाद्य प्रतिष्ठान बिना लाइसेंस के चल रहे हैं। जिसपर उपायुक्त ने सभी प्रतिष्ठानों को चिन्हित करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि जिन दुकानों को लाइसेंस लेना अनिवार्य है, उन्हें हर हाल में लाइसेंस लेना होगा। बिना लाइसेंस पाए जाने पर पहले चेतावनी और फिर सील करने तक की कार्रवाई की जाए।
छोटे दुकानदारों के लिए लगेगा विशेष शिविर
छोटे खाद्य कारोबारियों को राहत देते हुए उपायुक्त ने शिविर लगाने का निर्देश दिया है। इन शिविरों में दुकानदारों को लाइसेंस प्रक्रिया, जरूरी कागजात और खाद्य सुरक्षा नियमों की जानकारी दी जाएगी, ताकि वे आसानी से अपना पंजीयन करा सकें।
खटालों का भी होगा पंजीयन
बताया जाता है रामगढ़ शहर और आसपास के इलाकों में चल रहे दूध के खटालों का भी पंजीयन अनिवार्य किया गया है। अधिकारियों को खटालों की सूची तैयार कर निरीक्षण करने और साफ-सफाई व गुणवत्ता के मानकों का पालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है। अंत में उपायुक्त ने सभी विभागों को समन्वय बनाकर काम करने और नियमित जांच अभियान चलाने का निर्देश दिया, ताकि रामगढ़ के लोगों को मिलावट मुक्त भोजन मिल सके।

