लोहरदगा/रांची : लोहरदगा के कुटमू गांव में शुक्रवार को एक अप्रत्याशित मामले ने सभी को अचरज में डाल दिया। एक परिवार जिस बेटी को सात साल पहले मृत मान चुके था, शुक्रवार को उसकी घर वापसी ने सबको हैरान कर दिया। कुटमू की डफली उरांव अचानक घर पहुंची तो मां और भाई की आंखें भर आईं। माहौल बेहद भावुक हो गया और आस-पड़ोस के लोग भी दंग रह गए।

मिली जानकारी के अनुसार डफली 2019 में लापता हो गई थी। उस समय उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। काफी खोजबीन के बाद भी उसका पता नहीं चला। इसी दौरान कुडू थाना क्षेत्र में एक अज्ञात महिला का शव मिला। शव की स्थिति पहचान करने योग्य नहीं थी। डफली के कपड़ों से मिलते-जुलते कपड़ों के आधार पर परिजनों ने उसे डफली का शव मान लिया और अंतिम संस्कार कर दिया।

इस बीच डफली किसी तरह भटककर ओडिशा पहुंच गई और खुर्दा स्थित मिशन आसरा के संपर्क में आई। यहां से फिर महाराष्ट्र के श्रद्धावन रिहैबिलिटेशन फाउंडेशन ने उसकी देखभाल की। संस्था के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होने पर डफली ने अपना घर लोहरदगा के कुटमू में बताया, जिसपर संस्था के सदस्यों ने पते का सत्यापन कराया। पुष्टि होने पर डफली कुटमू लाया गया। दरवाजे पर बेटी को जीवित देख मां और भाई की आंखें छलक पड़ीं। खबर फैलते ही आसपास के लोग भी उसे देखने पहुंच गए 

सात साल बाद बेटी की वापसी ने परिवार की पुरानी मान्यता को बदल दिया, साथ ही कपड़ों के आधार पर शव के हुए पहचान पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

 

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