राजभाषा हिंदी का है समृद्ध इतिहास, गर्व से करें प्रयोग : अमित शाह

हिंदी दिवस पर देश के गृहमंत्री अमित शाह का राष्ट्र के लोगों के नाम संदेश

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हिंदी दिवस के अवसर पर देश के गृहमंत्री अमित शाह ने देश को लोगों को संबोधित कर ते हुए कहा है कि देश की भाषायी संपन्नता को ध्यान में रखते हुए देश के संविधान निर्माताओं ने भाषाओं का अलग से प्रावधान किया है। जिसमें प्रारंभ में 14 भाषाएँ रखी गई हैं, और अब आठवीं अनुसूची में कुल 22 भाषाए सम्मिलित हैं। भारत की सभी भाषाएं महत्वपूर्ण हैं और सबका समृद्ध इतिहास रहा है। विभिन्न भारतीय भाषाओं के साथ समन्वय स्थापित करते हुए हिंदी नेऔल
<span;> जनमानस के मन में विषेश स्थान प्राप्त किया है। यही कारण है कि आजादी के आंदोलन में अनेक स्वतंत्रता सेनानियों महात्मा गांधी, सरदार वल्लभ भाई पटेल, विनोबा भावे, आचार्य कृपलानी, काका साहेब कारेलकर, जवाहर लाल नेहरू, इन सभी ने हिंदी को संपर्क भाषा बनाकर आंदोलन की गति को बढ़ाने का काम किया। स्वराज के लिए स्वतंत्रता प्राप्ति के आंदोलन में स्वभाषा का आंदोलन निहित ही था। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए संविधान निर्माताओं ने अनुच्छेद 343 द्वारा संपूर्ण संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी को अपनाया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरणादायक नेतृत्व आज पूरा देश  आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है और प्रत्येक क्षेत्र में हम नयी उर्जा के साथ नये संकल्प ले रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि संविधान द्वारा निर्धारित राजभाषा हिंदी के लक्ष्यों को हम प्राप्त करें। किसी भी लोकतांत्रिक देश में सरकारी कामकाज की भाषा तभी सार्थक भूमिका अदा कर सकती है जब देश के जनसामान्य से वह जुड़ी हो। जितने भी निर्णय लिये जाते और जितनी भी नितीयां बनती हैं वे तभी लोकभोग्य हो सकती हैं जब वो स्थानीय लोगों की भाषा में हो। हिंदी की विशेषताओं को देखते हुए 14 सितंबर 1949 के दिन स्वीकार किया गया। इसके साथ ही हिंदी के प्रेरणा प्रोत्साहन की नीति अपनाई गई। पिछले तीन वर्षों में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकारी कामकाज में राजभाषा हिंदी का उपयोग अधिक हो इसके लिए गृहमंत्रालय के राजभाषा विभाग निरंतर प्रयासरत है। जिससे विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में हिंदी का उपयोग तेजी से बढ़ा है। गृहमंत्री ने कहा कि मई 2019 में नई सरकार के गठन के पश्चात 57 मंत्रालय में से 53 मंत्रालयों में हिंदी सलाहकार समिति का गठन कर दिया गया है तथा देश भर में राजभाषा के प्रयोग को बढ़ाने की दृष्टि से अबतक कुल 527 नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों का गठन किया गया है। राजभाषा विभाग ने श्रुति आधारित राजभाषा प्रणाली कंठस्थ का निर्माण किया है, जिसमें लगभग 22 लाख वाक्य शामिल किये जा चुके हैं। इस टूल से विभागों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाया जा रहा है।विभाग द्वारा हिंदी प्रवाह एप्प का निर्माण किया गया है जिसे अपनाकर 14 भाषाओं के भाषी मातृभाषा से निशुल्क हिंदी सीख सकते हैं। राजभाषा विभाग के ई-महाशब्दकोष में 90 हजार से ज्यादा शब्द 9 हजार से ज्यादा वाक्य सम्मिलित किये गये हैं। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश को नयी शिक्षा नीति मिली है जिसमें हिंदी को प्राथमिकता दी गई है। हिंदी समृद्ध भारत भाषाओं की सखी है। देशवासी अपनी समृद्ध भाषाओं पर गर्व करते हुए दैनिक कार्यों में अधिक से अधिक राजभाषा का प्रयोग करें।

 

Source- ministry of information and broadcast 

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