संस्कृति का संरक्षण और समुदाय के समेकित विकास का दिया संदेश

रामगढ़: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को टाउन हॉल में जिला प्रशासन द्वारा जिला स्तरीय आदिवासी महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि रामगढ़ विधायक ममता देवी शामिल रहीं। अवसर पर उपायुक्त ऋतुराज, वन प्रमंडल पदाधिकारी नीतीश कुमार, उप विकास आयुक्त आशीष अग्रवाल, सांसद प्रतिनिधि हजारीबाग राजीव जायसवाल सहित जिला परिषद सदस्य, अन्य जनप्रतिनिधि, विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, कला दलों के सदस्य और बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा भगवान बिरसा मुंडा, अमर शहीद सिदो मुर्मू, कान्हू मुर्मू, फूलों मुर्मू, झानो मुर्मू, चांद मुर्मू, भैरव मुर्मू के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इसके उपरांत उप विकास आयुक्त श्री आशीष अग्रवाल द्वारा स्वागत भाषण दिया गया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए विश्व आदिवासी दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला तथा जिले में आदिवासी समुदाय के सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।

आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण पर जोर: विधायक 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक ममता देवी ने विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, भाषा, कला एवं जीवनशैली हमारी समृद्ध विरासत का अभिन्न हिस्सा है। आदिवासी समाज ने प्रकृति एवं पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में सदियों से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय के विकास के साथ-साथ उनकी विशिष्ट पहचान एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। सरकार एवं जिला प्रशासन द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने जिले में आदिवासी समुदाय के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने तथा युवाओं को कौशल एवं रोजगार से जोड़ने की दिशा में भी विशेष प्रयास करने की आवश्यकता बताई।

समेकित विकास के लिए लॉन्च हुआ प्रोजेक्ट “समर्थ”

कार्यक्रम के दौरान रामगढ़ जिला अंतर्गत पीवीटीजी एवं अनुसूचित जनजाति के समेकित विकास हेतु चयनित 34 गांवों के लिए प्रोजेक्ट “समर्थ” का शुभारंभ किया गया। प्रोजेक्ट “समर्थ” के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से पीवीटीजी समूह एवं अनुसूचित जनजाति समूह के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक विकास की दिशा में कार्य किया जाएगा। परियोजना के माध्यम से संबंधित गांवों में उपलब्ध संसाधनों, आवश्यकताओं एवं चुनौतियों का आकलन करते हुए विभिन्न विभागों की योजनाओं का प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि लक्षित समुदायों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनके जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाया जा सके।

‘संस्कृति और विकास’ दोनों को साथ लेकर चलना जरूरी: उपायुक्त 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त ऋतुराज ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं एवं अधिकारों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि रामगढ़ जिले की पहचान यहां की विविधतापूर्ण आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं से भी जुड़ी हुई है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आजीविका एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ उपलब्ध कराया जाए।

उपायुक्त ने प्रोजेक्ट “समर्थ” के शुभारंभ को महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि चयनित 34 गांवों में योजनाओं के अभिसरण एवं चरणबद्ध कार्ययोजना के माध्यम से पीवीटीजी एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के समेकित विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विकास का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब समाज के सबसे अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। उन्होंने आदिवासी संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि युवाओं एवं बच्चों को अपनी संस्कृति से जोड़ना आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

फूड स्टॉल, पेंटिंग, रंगोली एवं रील मेकिंग प्रतियोगिता ने बढ़ाई कार्यक्रम की रौनक

जिला स्तरीय आदिवासी महोत्सव के दौरान आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं को केंद्र में रखते हुए विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम परिसर में आदिवासी संस्कृति पर आधारित फूड स्टॉल, पेंटिंग, रंगोली एवं रील मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। फूड स्टॉल के माध्यम से आदिवासी समाज के पारंपरिक व्यंजनों एवं खान-पान की विविधता को प्रदर्शित किया गया। वहीं पेंटिंग एवं रंगोली के माध्यम से प्रतिभागियों ने आदिवासी जीवन, प्रकृति, परंपरा एवं संस्कृति को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया। रील मेकिंग प्रतियोगिता के माध्यम से युवाओं ने आधुनिक डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते हुए आदिवासी संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

महोत्सव के दौरान कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, रामगढ़ एवं जिले के विभिन्न कला दलों द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। पारंपरिक नृत्य, संगीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से कलाकारों ने आदिवासी समाज की समृद्ध परंपरा एवं सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरा टाउन हॉल परिसर आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं के रंग में रंगा नजर आया।

 लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों का हुआ वितरण

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभुकों के बीच योजनाओं का लाभ प्रदान किया गया। सामुदायिक वन पट्टा के 6 लाभुकों, निशुल्क साइकिल वितरण योजना के 17 विद्यार्थियों, प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के 2 लाभुकों को लाभ प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त जेएसएलपीएस के अंतर्गत चक्रीय निधि, सामुदायिक निवेश एवं सामुदायिक सुरक्षा कोष के तहत एक-एक लाभुक को योजना का लाभ प्रदान किया गया। वहीं आदिवासी समूह के बच्चों में मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट की परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी कार्यक्रम के दौरान सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर उन्हें आगे भी बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने विभिन्न स्टॉल एवं प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा प्रतिभागियों और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

 

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