रांची: पब्लिक स्कूल एंड चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में रविवार को रांची विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में 14वें शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें तकरीबन 2500 शिक्षकों को शॉल और मोमेंटों भेंट कर सम्मानित किया गया। अवसर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए।
समारोह में बतौर मुख्य अतिथि स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह शामिल हुए। अपने संबोधन में उन्होंने ने कहा कि किसी शिक्षण संस्थान की पहचान वहां के शिक्षक और विद्यार्थियों से होती है। शिक्षक बच्चों को शिक्षा देने के साथ उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।उन्होंने कहा कि ऑनलाइन माध्यम से दूर-दराज के विद्यार्थियों तक बेहतर शिक्षकों की पढ़ाई पहुंचाई जा सकती है। AI को शिक्षा में उपयोगी साधन बताते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह शिक्षक का विकल्प नहीं हो सकता।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पासवा के मुख्य संरक्षक रामेश्वर उरांव ने कहा कि 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर कार्यक्रम नहीं हो पाने के कारण अब यह आयोजन किया गया है। उन्होंने शिक्षक की तुलना कुम्हार से करते हुए कहा कि जिस तरह कुम्हार मिट्टी को आकार देता है, उसी तरह शिक्षक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को गढ़ते हैं। उन्होंने शिक्षा के साथ छात्रों के स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर जागरूकता अभियान चलाने की भी बात कही।
अवसर पर डीजी रेल अनिल पालटा ने शिक्षकों के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनकी डांट-फटकार भी विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए होती है। उन्होंने युवाओं से कम अंक आने पर निराश न होने और नए क्षेत्रों में करियर की संभावनाएं तलाशने की अपील की। कार्यक्रम में रांची विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति अजीत सिंह, रिम्स निदेशक डॉ. डीके सिन्हा समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
