रांची: झारखंड की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को विश्वविद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था और पर्याप्त अवसर देने की मांग को लेकर मंगलवार को राजधानी में बड़ा प्रदर्शन हुआ। झारखंड जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा मोर्चा के नेतृत्व में निकाली गई रैली में विभिन्न जिलों से पहुंचे विद्यार्थियों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाषाई अधिकारों को लेकर आवाज बुलंद की।

मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से शुरू हुई रैली शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरी। इसका नेतृत्व आदिवासी नेता बंधु तिर्की ने किया। प्रदर्शन में विश्वविद्यालयों के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभागों से जुड़े छात्र-छात्राओं, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों और आदिवासी संगठनों के सदस्यों ने हिस्सा लिया।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि झारखंड की भाषाएं केवल सांस्कृतिक विरासत नहीं, बल्कि राज्य की पहचान और सामाजिक जीवन का आधार हैं। इसलिए इनके संरक्षण के साथ पढ़ाई और आगे बढ़ने के अवसर भी सुनिश्चित किए जाने चाहिए।
मोर्चा ने विश्वविद्यालयों में भाषा विभागों को सशक्त बनाने, नियमित पढ़ाई की व्यवस्था करने और जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को शिक्षा व्यवस्था में उचित स्थान देने की मांग उठाई। रैली में शामिल लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-नगाड़ों और लोकनृत्य के माध्यम से भी अपनी सांस्कृतिक पहचान प्रदर्शित की।
आंदोलन के जरिए सरकार और शैक्षणिक संस्थानों का ध्यान इस ओर खींचने का प्रयास किया गया कि झारखंडी भाषाओं के संरक्षण के लिए केवल सांस्कृतिक आयोजन पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भी ठोस अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत है।

