रांची: राजधानी के मधुकम इलाके में 45 डिसमिल जमीन को लेकर चल रहे विवाद में झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने वर्ष 2024 में पारित उस आदेश को प्रभावहीन घोषित कर दिया है, जिसके तहत 12 गैर-आदिवासी परिवारों के मकानों को हटाने का निर्देश दिया गया था। मामला RS प्लॉट संख्या 319, खाता 179 से जुड़ा है। याचिकाकर्ता महादेव उरांव ने दावा किया था कि यह जमीन उनके पूर्वजों की है और 1996 में SAR कोर्ट ने उनके पक्ष में आदेश दिया था। उन्होंने CNT एक्ट 1908 की धारा 71-A के तहत याचिका दायर कर कब्जा मांगा था।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि 2024 का आदेश महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर प्राप्त किया गया था। न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने अदालत को यह नहीं बताया कि जमीन को लेकर 12 परिवारों से समझौता हुआ है और उनसे करीब 1.08 करोड़ रुपये का लेन-देन भी हुआ है।

अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताते हुए कहा कि तथ्य छिपाना न्यायिक प्रक्रिया का अपमान है। इसी आधार पर कोर्ट ने 2024 के आदेश को रद्द कर दिया और 12 परिवारों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगा दी।

साथ ही अदालत ने महादेव उरांव पर 12 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और प्रत्येक प्रभावित परिवार को 1-1 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया। अदालत ने सर्किल अधिकारी को भी निर्देश दिया कि मामले के लंबित रहने तक किसी प्रकार की कार्रवाई न की जाए।

 

Credit: image courtesy- Jharkhad High Court 

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