रांची: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में आ रही बाधाओं को लेकर कांग्रेस ने समय-सीमा 30 दिन बढ़ाने की मांग की है। पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को प्रदेश प्रभारी के. राजू और अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के नेतृत्व में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस ने आशंका जताई कि दस्तावेजों की कमी, प्रशासनिक देरी और तकनीकी खामियों के कारण कई योग्य मतदाता प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं।

कांग्रेस ने 31 अक्टूबर तक के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि राज्य में 59.56 लाख से अधिक नोटिस जारी हुए हैं। इनमें करीब 40.25 लाख मामलों की सुनवाई पूरी हुई, जबकि 19.31 लाख से अधिक मामले अभी भी लंबित हैं। पार्टी के अनुसार 5.06 लाख से ज्यादा नोटिस अब तक संबंधित मतदाताओं तक नहीं पहुंचे हैं। कांग्रेस का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में लंबित मामलों को मौजूदा समयसीमा के भीतर निपटाना संभव नहीं है।

प्रदेश प्रभारी के. राजू ने कहा कि कई प्रखंडों में स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र जारी करने में देरी हो रही है। जाति प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर और वंशावली तैयार कराने में भी लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। इससे मतदाताओं के लिए निर्धारित दस्तावेज जुटाना मुश्किल हो रहा है और वे समय पर सुनवाई में अपना पक्ष नहीं रख पा रहे हैं।

ज्ञापन में बीएलओ ऐप की तकनीकी गड़बड़ियों का भी मुद्दा उठाया गया। कांग्रेस का दावा है कि सुनवाई पूरी होने के बाद भी कुछ मतदाताओं का रिकॉर्ड पोर्टल पर लंबित दिख रहा है और दोबारा नोटिस जारी हो रहे हैं। इससे मतदाताओं में भ्रम और परेशानी बढ़ रही है। पार्टी ने प्रमाण पत्रों के त्वरित निष्पादन, सत्यापन के बाद स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र स्वीकार करने और सुनवाई पूरी होने पर मतदाताओं को एसएमएस भेजने की मांग की।

प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि दिवाली, भैया दूज और छठ जैसे त्योहारों के कारण लोगों को सरकारी कार्यालयों तक पहुंचने में अतिरिक्त कठिनाई हो रही है। ऐसे में मौजूदा समयसीमा के भीतर सभी मतदाताओं की सुनवाई पूरी करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान कार्यालयों में कामकाज भी प्रभावित हुआ है, जिसका असर सीधे एसआईआर की प्रक्रिया पर पड़ा है।

कांग्रेस ने निर्वाचन पदाधिकारी से आग्रह किया कि प्रक्रिया में कम से कम 30 दिनों की अतिरिक्त मोहलत दी जाए, ताकि दस्तावेजी और प्रशासनिक परेशानियों के कारण किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से छूटने की नौबत न आए। ज्ञापन सौंपने वालों में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, विधायक रामचंद्र सिंह, सुबोध कांत सहाय, बन्ना गुप्ता, प्रदीप कुमार बालमुचू, भूषण वाड़ा समेत पार्टी के कई नेता शामिल थे।