| परिजनों और स्थानीय लोगों ने काटा बवाल |
रामगढ़: भुरकुंडा स्थित निजी नर्सिंग होम भुरकुंडा सेवा सदन में ऑपरेशन से प्रसव के बाद महिला की स्थिति बिगड़ने और अत्यधिक रक्तस्राव से मौत का मामला प्रकाश में आया है। महिला की मौत से आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने सोमवार की सुबह निजी नर्सिंग होम का घेराव कर जमकर बवाल काटा। काफी देर तक गहमागहमी के बाद पंचायत प्रतिनिधियों के हस्तक्षेप पर वार्ता हुई। जिसमें मुआवजा पर सहमति बनने के बाद मामला शांत हुआ।

मिली जानकारी के अनुसार चोरधरा पंचायत के बिरसा नगर, दुंदुवा निवासी नीता देवी (26 वर्ष) पति धनीराम मांझी आठ माह की गर्भवती थी। बीते 28 मार्च की सुबह पांच बजे तेज पेट दर्द होने पर उन्हें भुरकुंडा सेवा सदन में भर्ती कराया गया। जहां बड़ा ऑपरेशन (सिजेरियन सेक्शन) करके प्रसव कराया गया। ऑपरेशन के बाद बच्चेदानी से रक्तस्राव होने लगा जिससे महिला की स्थिति बिगड़ने लगी। इसपर डॉक्टर ने परिजनों ने क्रिटिकल कंडीशन बताते हुए बच्चेदानी निकालने की बात कही और ऑपरेशन शुरू किया गया। बावजूद इसके रक्तस्राव जारी रहा और नीता देवी की स्थिति और बिगड़ती चली गई। जिसके बाद डॉक्टर ने उनकी नाजुक हालत देख परिजनों को बड़े अस्पताल ले जाने का परामर्श दिया।
परिजनों के अनुसार आनन-फानन में नीता देवी को रामगढ़ के एक निजी अस्पताल ले गए जहां नीता देवी की काफी नाजुक स्थिति देखते हुए उपचार में असमर्थता जता दी गई। यहां से नीता देवी को रांची ले जाया गया। जहां जान बचाने की कवायदों के बीच रविवार की देर रात उन्होंने दम तोड़ दिया। बताया जाता है कि महिला ने कन्या शिशु को जन्म दिया है। जिसे फिलहाल रामगढ़ के एक प्राइवेट अस्पताल में वेंटिलेटर पर रखा गया है। महिला अपने पीछे पति और पांच वर्षीय पुत्र भी छोड़ गई है।
वार्ता में 13 लाख रुपये मुआवजे पर बनी सहमति
इधर, नर्सिंग होम में हंगामे के बाद चोरधरा पंचायत के मुखिया राम नारायण और जवाहर नगर पंचायत के पूर्व मुखिया प्रदीप मांझी की अगुवाई में परिजनों ने नर्सिंग होम के डॉ. पीसी हांसदा के साथ वार्ता की। एकरारनामे के अनुसार 13 लाख मुआवजे पर सहमति बनी। आठ लाख और पांच लाख के दो चेक दिए गए (चेक संख्या 211294 और 211295), जबकि मृतका के अंतिम संस्कार हेतु 10 हजार रुपये तत्काल दिए गए।
महिला की मौत से स्थानीय लोगों में नाराजगी, व्यवस्था पर सवाल
घटना को लेकर क्षेत्र के लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोग प्राइवेट अस्पताल और नर्सिंग होम से जुड़े अपने अनुभवों की चर्चा करते और सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं को कोसते देखे गए। कई लोगों का कहना है कि प्राइवेट अस्पताल और नर्सिंग होम की औचक जांच होती रहनी चाहिए और प्रशासन को यहां उपलब्ध सेवाओं और सुविधाओं को लेकर कड़ी निगरानी भी जरूर रखनी चाहिए। बरहाल, जहां पहले जिला स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारी प्राइवेट क्लीनिक और नर्सिंग होम का गाहे-बगाहे औचक निरीक्षण करते थे। वहीं वर्तमान में समीक्षा बैठकों में आदेश-निर्देश देकर काम चला ले रहे हैं।
