मिट्टी की सेहत सुधारने और कृषि लागत कम करने का हो प्रयास: डॉ. सुधांशु
रामगढ़: कृषि विज्ञान केंद्र मांडू के तत्वावधान में सोमवार को आदिवासी बहुल ग्राम रंगूबेरा में ‘खेती बचाओ’ अभियान का शुभारंभ किया गया। जिसमें 50 से अधिक किसानों की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विज्ञान केंद्र मांडू के प्रधान वैज्ञानिक सह अध्यक्ष डॉ. सुधांशु शेखर ने की। अवसर पर प्रखंड कृषि पदाधिकारी विनिता सिंह, विषय वस्तु विशेषज्ञ (कृषि प्रसार) डॉ. इन्द्रजीत समेत शाहिद सिद्दीकी, कैलाश करमाली, अनिला टुडू, राजा हांसदा, धनेश्वर हांसदा और मेनका मांझी उपस्थित रहे।
अवसर पर किसानों को बताया गया कि अभियान के अंतर्गत किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जल संरक्षण, हरी खाद, संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक – प्राकृतिक खेती औल जलवायु-अनुकूल कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक किया जाएगा। किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने, लागत कम करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में डॉ. सुधांशु शेखर ने कहा कि वर्तमान समय में मृदा की उर्वरता में कमी, जल संसाधनों का क्षरण और जलवायु परिवर्तन कृषि के समक्ष बड़ी चुनौतियाँ हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए किसानों को मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन,फसल विविधीकरण, जैविक खादों के उपयोग तथा वर्षा जल संरक्षण को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि खेती को बचाने के लिए मिट्टी, पानी और जैव विविधता का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
वहीं विनिता सिंह ने किसानों को कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं अनुदान कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए वैज्ञानिक खेती को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सतत कृषि पद्धतियों के माध्यम से किसान अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि संसाधनों का संरक्षण भी कर सकते हैं।
इस दौरान डॉ. इन्द्रजीत ने किसानों को फसल चक्र, हरी खाद,जैव उर्वरकों तथा एकीकृत कृषि प्रणाली के महत्व पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कृषि में नवाचारों एवं वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान किसानों के साथ संवाद सत्र आयोजित किया गया,जिसमें कृषि उत्पादन, कीट एवं रोग प्रबंधन,जल संरक्षण तथा प्राकृतिक खेती से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। वहीं किसानों ने अपने अनुभवों के साथ-साथ अपनी समस्याओं को साझा किया। जिनका समाधान विशेषज्ञों द्वारा किया गया।
