रामगढ़: सीसीएल प्रबंधन के लिए आउटसोर्सिंग कंपनी PSME सिरदर्द बनती दिख रही है। सीसीएल बरका-सयाल प्रक्षेत्र अंतर्गत भुरकुंडा परियोजना के बलकुदरा खुली खदान में कामकाज फिर एक बार ठप है। तकरीबन पांच दिनों से माइंस में जमा ओबी और कोयले का उठाव नहीं हो रहा है और माइनिंग कार्य प्रभावित है। फिलहाल खदान में सन्नाटा पसरा दिख रहा है।
बताया जाता है कि बलकुदरा खदान में दूसरी बार आउटसोर्सिंग कंपनी ने काम रोक दिया है। हालांकि इस संबंध में अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। जानकारी के अनुसार यहां प्रतिदिन तीन पालियों में लगभग 200 ट्रिप ओबी और 40 ट्रिप कोयले का उठाव किया जाता है। संप्रेषण नहीं होने से माइंस से निकाला गया कोयला और ओबी यथावत पड़ा हुआ है। जानकारों की मानें तो उठाव न होने की दशा में भीषण गर्मी से कोयले में आग लगने की भी संभावना है। जिससे सीसीएल को काफी नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।
बताते चलें कि इससे पहले भी आउटसोर्सिंग कंपनी ने 30 नवंबर 2025 को सयाल डी माइंस में काम बंद कर दिया था। जबकि 6 नवंबर 2025 को बलकुदरा खुली खदान में भी काम रोक दिया था। 26 दिनों तक जारी जद्दोजहद के बाद 2 दिसंबर 2026 बलकुदरा माइंस में काम पुनः शुरू हुआ। भुरकुंडा परियोजना पदाधिकारी ने बकायदा नारियल फोड़कर इसकी शुरुआत भी की। तब प्रबंधन की ओर से कहा गया था कि बातचीत के बाद आउटसोर्सिंग कंपनी काम करने के लिए राजी हो गई है। जितने दिन काम ठप रहा उसकी भी भरपाई करेगी। इधर, लगभग साढ़े चार माह बाद काम फिर से रूका हुआ है। देखना यह होगा कि काम कितनी जल्दी शुरू हो पाता है, या फिर आउटसोर्सिंग कंपनी के विरुद्ध सीसीएल क्या कुछ कदम उठा पाती है।
