रिपोर्ट – एस. अंसारी 

रांची: सहारा समूह में जमा अपनी मेहनत की कमाई वापस लौटाने की मांग को लेकर निवेशकों ने रविवार को रांची में सत्याग्रह शुरू किया। विश्व भारती जनसेवा संस्थान के बैनर तले लोक भवन के समीप जुटे निवेशकों ने सरकार से लंबित भुगतान की प्रक्रिया तेज करने और उनकी जमा राशि जल्द लौटाने की मांग उठाई।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि झारखंड में सहारा की विभिन्न योजनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की रकम लंबे समय से अटकी हुई है। उनका दावा है कि मैच्योरिटी पूरी होने के बावजूद कई निवेशकों को अब तक पूरी राशि नहीं मिल पाई है। आंदोलनकारियों के मुताबिक, आर्थिक तंगी के कारण कई परिवारों को इलाज, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतों में परेशानी झेलनी पड़ रही है।

सत्याग्रह कर रहे लोगों ने दावा किया कि रकम फंसने के कारण आर्थिक संकट से जूझते हुए झारखंड में 74 निवेशकों की मौत हो चुकी है। कुछ मामलों में आत्महत्या का दावा भी किया गया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रदर्शनकारियों ने मृत निवेशकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग रखी है।

निवेशकों ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से CRCS-Sahara Refund Portal के जरिए भुगतान की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद बड़ी संख्या में दावे अभी भी लंबित हैं। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि दस्तावेजी अथवा तकनीकी कमियों के कारण अटके दावों का दोबारा सरल तरीके से सत्यापन कराया जाए और पात्र निवेशकों को पूरी देय राशि उपलब्ध कराई जाए।

बताया जाता है कि उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक फरवरी 2026 तक पोर्टल पर 1.45 करोड़ से अधिक आवेदन और करीब 4.06 करोड़ दावे दर्ज किए गए थे। इनमें लगभग 8,783.55 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने की जानकारी दी गई थी। निवेशकों का कहना है कि दावों की तुलना में भुगतान की राशि अभी काफी कम है।

सत्याग्रह में शामिल लोगों ने सहारा से जुड़ी संपत्तियों, निवेशकों की जमा राशि और पूरे वित्तीय लेनदेन की जांच कराने की मांग की। उनका कहना है कि केवल रिफंड प्रक्रिया पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिन लोगों की भूमिका से निवेशकों को परेशानी हुई है, उनकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से पूरी रकम की वापसी, लंबित दावों की पुनः जांच, आसान दस्तावेजी प्रक्रिया, निष्पक्ष जांच और मृत निवेशकों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है। निवेशकों का कहना है कि वे वर्षों से अपनी जमा पूंजी की वापसी का इंतजार कर रहे हैं।