रांची: विश्व प्रसिद्ध मुड़मा जतरा स्थल से करीब 500 मीटर की दूरी पर स्थित 1.80 डिसमिल जमीन को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने आए हैं। इस जमीन को लेकर रैयत और जतरा आयोजन से जुड़े पक्ष इन दिनों आमने-सामने हैं।

रैयत बिरसा उरांव का दावा है कि यह उनकी पुरखौती जमीन है। वे इस पर घर बनाना चाहते हैं। उनके अनुसार अब तक इस जमीन का आधिकारिक सीमांकन नहीं कराया गया है और घर बनाने का प्रयास करने पर निर्माण कार्य रोक दिया जाता है। रैयत का कहना है कि उन्हें जमीन के बदले जमीन देने की बात लंबे समय से कही जा रही है। उन्होंने बताया कि मामले को लेकर उन्होंने कोर्ट, उपायुक्त, एलआरडीसी और सीओ के साथ-साथ राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा, मुड़मा में भी आवेदन दिया है।

वहीं, धर्मगुरु बंधन तिग्गा के अनुसार मुड़मा जतरा के लिए 65 एकड़ से अधिक जमीन है। उन्होंने कहा कि जतरा आयोजन में सभी धर्म और समाज के लोगों की भागीदारी रहती है और कई लोगों ने अपनी जमीन जतरा के लिए दी है। मुड़मा जतरा मुंडा और उरांव समाज का प्रमुख आयोजन है। फिलहाल इस 1.80 डिसमिल जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है और इसका जतरा भूमि से क्या संबंध है, यह प्रशासनिक दस्तावेज और सीमांकन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।