धनबादः कतरास में भू-धंसान का खतरा बढ़ने के साथ अब संभावित विस्थापन से रोजगार का संकट भी लोगों को परेशान करने लगा है। वर्षों से घर और कारोबार के सहारे जीवन चला रहे परिवारों को डर है कि दूसरी जगह भेजे जाने की स्थिति में उनके सामने आजीविका का सवाल खड़ा हो सकता है। इसी चिंता को लेकर कतरास बचाओ संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में स्थानीय लोगों और दुकानदारों ने सड़क पर उतरकर विरोध जताया। आंदोलन के समर्थन में दुकानदारों ने अपनी दुकानें भी बंद रखीं।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कतरास से लोगों को हटाने का फैसला सिर्फ मकान बदलने तक सीमित नहीं होगा। छोटे दुकानदार, कारोबारी और रोजाना कमाई पर निर्भर परिवार अपना मौजूदा रोजगार खो सकते हैं। नए स्थान पर बसने के बाद पुराना ग्राहक वर्ग और कारोबार का आधार भी खत्म हो सकता है। इसलिए पुनर्वास की योजना में रोजगार और कारोबार की सुरक्षा को भी शामिल किया जाना चाहिए।

मोर्चा के सदस्यों ने कहा कि कतरास के लोगों का जीवन यहां की जमीन, घर और बाजार से जुड़ा हुआ है। ऐसे में बिना मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार की स्पष्ट व्यवस्था के विस्थापन की किसी भी प्रक्रिया का विरोध किया जाएगा।

वहीं, दुकानदारों ने बाजार बंद रखकर अपनी चिंता जाहिर की। उनका कहना था कि भू-धंसान की समस्या का समाधान जरूरी है, लेकिन इसका बोझ स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी पर नहीं पड़ना चाहिए। प्रभावित परिवारों के लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे सुरक्षित स्थान पर जाने के बाद भी उनकी आय का साधन बना रहे।

प्रदर्शनकारियों ने भू-धंसान प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराने, लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और विस्थापन की स्थिति में मुआवजा, पुनर्वास तथा रोजगार को लेकर स्पष्ट नीति बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर बीसीसीएल में चक्का जाम करने की चेतावनी भी दी गई।