रांची: मोरहाबादी में 30 अगस्त को हुए आदिवासी एकता महाजुटान के बाद अब आंदोलन का रुख दिल्ली की ओर मुड़ेगा। पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने मंगलवार को अपने आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि परिसीमन के मुद्दे को भटकने नहीं दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि परिसीमन को लेकर 5 प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। इन्हें राष्ट्रपति, कानून मंत्री और सभी राजनीतिक दलों के समक्ष रखा जाएगा। बंधु तिर्की ने कहा कि इस मुहिम का सबसे बड़ा मुद्दा विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाना है। 2002-08 के परिसीमन में एसटी की 28 सीटों को 22 करने की कोशिश हुई थी, जिसे झारखंड के विरोध के बाद मनमोहन सिंह सरकार ने टाल दिया था। अब फिर वही खतरा है।
बंधु तिर्की ने कहा कि मुद्दा सिर्फ आरक्षित सीटों का नहीं है। यह पांचवीं अनुसूची, सीएनटी-एसपीटी एक्ट, स्थानीय नीति और विस्थापन से भी जुड़ा है। पांचवीं अनुसूची लागू होने के बावजूद बांध और उद्योगों के नाम पर आदिवासी विस्थापन हो रहा है, जरूरत पड़ी तो सरकार से जवाब भी मांगा जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मेयर रामा खलखो, दयामनी बारला, लक्ष्मी नारायण मुंडा, अजय तिर्की, शशि पन्ना, ज्योत्सना केरकेट्टा और शिवा कच्छप मौजूद थे।
