बजा नगाड़ा, लहराए पारंपरिक हथियार, जमकर हुई नारेबाजी 

 रोजी-रोजगार और अन्य मांगों को लेकर बुलंद की आवाज, किया प्रदर्शन 

रामगढ़: संयुक्त विस्थापित प्रभावित मोर्चा के बैनर तले शनिवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भुरकुंडा में संगम ओसीपी के निकट आउटसोर्सिंग कंपनी के वाहनों का परिचालन ठप करा दिया। ढोल-नगाड़े और पारंपरिक हरवे-हथियार के साथ सैकड़ों की संख्या में पहुंचे महिला और पुरुषों ने अपनी मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की। इस दौरान सीसीएल प्रबंधन पर वर्षों से रैयत-विस्थापितों की उपेक्षा करने और सुविधाओं से वंचित रखने का भी आरोप लगाया गया। 

ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि आउटसोर्सिंग कंपनी का कोल ट्रांसपोर्टिंग कार्य रैयत विस्थापितों को दिया जाए, भुरकुंडा लोकल सेल अविलंब चालू किया जाए, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देशानुसार आउटसोर्सिंग कार्य  में 75 प्रतिशत रैयत-विस्थापितों को रोजगार सुनिश्चित कराया जाए, सीएसार के माध्यम से चारों राजस्व गांव का विकास किया जाए और बिजली-पानी की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। नारेबाजी के बीच ग्रामीणों ने कहा कि मोर्चा द्वारा दिए गए छह सूत्री मांगों पर प्रबंधन अविलंब पहल नहीं करती है तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा और खनन कार्य नहीं होने दिया जाएगा।

इस दौरान पूर्व जिला पार्षद झरी मुंडा ने कहा कि क्षेत्र के कई रैयत विस्थापितों को आज तक नौकरी और मुआवजा नहीं मिल सका है। सीसीएल की ओर से हमलोगों को कोई भी सुविधा और सहूलियत नहीं दी जाती है। यहां के गरीब रैयत-विस्थापित परिवार रोजी-रोटी के लिए पलायन करने को विवश हैं। कहा कि अब प्रबंधन की मनमानी नहीं चलेगी, क्षेत्र के रैयत-विस्थापित अपना अधिकार और सम्मान लेकर रहेंगे। 

वहीं ट्रांसपोर्टिंग ठप किए जाने की सूचना पर पहुंचे भुरकुंडा कोलियरी प्रबंधन के अधिकारों ने मोर्चा के प्रतिनिधियों से बातचीत की। साथ ही लिखित आश्वासन दिया कि आगामी 19 मई को भुरकुंडा परियोजना कार्यालय में सुबह 11:00 बजे त्रिपक्षीय वार्ता की जाएगी। जिसमें सीसीएल भुरकुंडा प्रबंधन के अधिकारी, आउटसोर्सिंग कंपनी के अधिकारी और मोर्चा के प्रतिनिधि शामिल रहेंगे। वार्ता में मांगों पर विचार विमर्श कर उचित पहल की जाएगी। 

वहीं मोर्चा की ओर स्पष्ट किया है कि यदि त्रिपक्षीय वार्ता में विस्थापितों एवं प्रभावितों की मांगों को गंभीरता से लेते हुए ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है, तो आगे व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा। जिसकी पूरी जवाबदेही सीसीएल प्रबंधन की होगी।

आंदोलन में झरी मुंडा, राणा प्रताप सिंह, संतोष मांझी, अनिल एक्का, संजय मांझी, फुलेश्वर राम, अभिजीत मांझी, राजाराम प्रसाद, विरेंद्र गागु, अजय साहू, उमेश बड़ाईक, हिरण्यम मांझी, कृष्णा मांझी, रोहित मुंडा सुनील बेदिया, मयूर सिंह, जयमंगल बेदिया, परमवीर सिंह, राजकुमार साहू, दीपक मुंडा, नरेंद्र बेदिया, महेंद्र सिंह, राजेंद्र मुंडा, मिलन मुंडा, राकेश मांझी, मनन सिंह, बिंदु मुंडा, जगनाथ मुंडा, राजेंद्र पाहन, शंकर मुंडा, बबलू मुंडा, राजकृष्ण सिंह, जगा मांझी, राजू मुंडा, मुकेश सिंह, राजीव सिंह, सूरज मुंडा, विरेंद्र मुंडा, विजय कुमार टुडू, पिल्लू महतो, देवेंद्र सिंह, राजीव मुंडा, मनोज सिंह, रूपलाल मुंडा, नरेश बेसरा, ललमुनी देवी, कविता देवी, मीना देवी, हीरा देवी, रानी कुमारी मांझी, लक्ष्मी देवी, गीता देवी, सरिता देवी, चूनी देवी, नगीना कुम्हार, फुलमनी देवी, गायत्री देवी, ललिता देवी, सुमन देवी, चमेली देवी, बाडो मुंडी, गीता देवी, किरण देवी सहित सैकड़ों ग्रामीण शामिल थे।

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