रांची/नई दिल्ली: परिसीमन के बाद आदिवासी समुदाय का राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुरक्षित रखने के लिए पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से मुलाकात कर संवैधानिक संशोधन की मांग की। मंगलवार को सौंपे गए ज्ञापन में उन्होंने लोकसभा और विधानसभा की सीटें बढ़ने पर अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटों में भी आनुपातिक वृद्धि सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
तिर्की ने संविधान के अनुच्छेद 330(2) और 332(3) में संशोधन के साथ झारखंड समेत पांचवीं अनुसूची वाले राज्यों को विशेष संरक्षण देने की मांग की। उन्होंने वर्ष 2007 के परिसीमन का हवाला देते हुए कहा कि उस समय झारखंड में आरक्षित विधानसभा सीटें 28 से घटाकर 22 और लोकसभा सीटें पांच से घटाकर चार करने का प्रस्ताव सामने आया था।
उन्होंने परिसीमन से जुड़े मामलों में राज्यपाल, जनजातीय सलाहकार परिषद और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की भूमिका सुनिश्चित करने तथा संभावित प्रभावों के अध्ययन के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का सुझाव भी दिया।
मुलाकात में ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय समन्वयक शशि पन्ना मौजूद थे। प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता शुभाशिष रसिक सोरेन और एनयूएसआरएल, रांची के सहायक प्राध्यापक रामचंद्र उराँव के कानूनी अभिमत भी सौंपे। केंद्रीय मंत्री ने ज्ञापन का संज्ञान लेते हुए जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त जानकारी के लिए संपर्क करने की बात कही।

