रांची: झारखंड विधानसभा के मॉनसून सत्र के तीसरे दिन वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट पास हुआ। बजट में  8,399 करोड़ 31 लाख रुपये की अनुदान मांगों को सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही सरकारी खर्च को वैधानिक आधार देने वाला झारखंड विनियोग संख्या-3 विधेयक, 2026 भी पारित हो गया।

ग्रामीण विकास को मिला सबसे बड़ा हिस्सा

अनुपूरक बजट में सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र की योजनाओं को खास प्राथमिकता दी है। ग्रामीण विकास विभाग के लिए 4,258 करोड़ 67 लाख 35 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है, जो सभी विभागों में सबसे अधिक है। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में कार्यों से जुड़े ग्रामीण कार्य विभाग को 885 करोड़ 83 लाख रुपये दिए गए हैं।

शिक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए भी बड़ा प्रावधान

शिक्षा क्षेत्र के लिए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को 946 करोड़ 3 लाख 95 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा एक अन्य मद में 25 करोड़ 5 लाख 67 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं।जबकि आपदा से निपटने और राहत से जुड़ी जरूरतों के लिए आपदा प्रबंधन मद में 490 करोड़ 6 लाख 89 हजार रुपये रखे गए हैं। गृह प्रभाग को भी  144 करोड़ 16 लाख 93 हजार रुपये का आवंटन मिला है।

जलापूर्ति, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पर भी नजर

अनुपूरक बजट में बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विभागों को भी अतिरिक्त राशि दी गई है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के लिए 271 करोड़ 61 लाख 4 हजार रुपये, जबकि पंचायती राज विभाग के लिए 244 करोड़ 80 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और परिवार कल्याण विभाग को 218 करोड़ 16 लाख 90 हजार रुपये दिए गए हैं।

खनन और कल्याण विभाग को भी मिला अतिरिक्त बजट

राज्य के खनन क्षेत्र से जुड़े खान एवं भूतत्व विभाग के लिए 173 करोड़ 65 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। वहीं विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े कल्याण विभाग को 91 करोड़ 24 लाख 50 हजार रुपये का प्रावधान मिला है। 

31 मार्च 2027 तक सरकारी खर्च का रास्ता साफ

विनियोग विधेयक के पारित होने के बाद 31 मार्च 2027 तक सरकार द्वारा किए जाने वाले खर्च के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान सुनिश्चित हो गया है। सदन में विधेयक पर चर्चा के बाद इसके सभी हिस्सों को ध्वनिमत से मंजूरी दी गई और फिर इसे अंतिम रूप से पारित कर दिया गया।

 

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