
रिपोर्ट – रघुनंदन
रामगढ़: जीवन को देखने का नजरिया सभी का भले ही अलग-अलग हो, लेकिन ये मानवीय संवेदनाएं ही हैं जो कालांतर से मनुष्यों को श्रेष्ठ साबित करती रही हैं। “दया” का भाव वह मानवीय गुण है, जो विधाता ने सिर्फ हमें सौंपा है। श्रेष्ठ वहीं जो सबको साथ लेकर चले और जीवन वही जो दूसरों के काम आए।


भुरकुंडा कोयलांचल के सेंट्रल सौंदा का मनीष उन चुनिंदा युवाओं में से है जिसमें जीवन में कुछ अलग करने का जुनून भी है और मानवीय संवेदनाएं भी। वह फिटनेस फ्रीक भी है और जीव-जंतुओं के प्रति अगाध स्नेह भी रखता है। सड़क किनारे एक बेजुबान बिहार कुत्ते को बिस्कुट खिलाते और दवा देते मनीष पर राह चलते लोगों के साथ-साथ हमारी नजर भी पड़ी। यह कतई सामान्य घटना नहीं थी। जहां अन्य लोगों के लिए वह बीमार कुत्ता शून्य से ज्यादा कुछ नहीं था, वहीं मनीष पूरी तन्मयता से उसके बिस्कुट-चिप्स के साथ दवा भी दे रहा था। एकबारगी यह लगा कि कुत्ते को देख रास्ते से गुजर रहे बाइक सवार मनीष के मन में करूणा जाग उठी होगी, लेकिन लोगों ने बताया कि क्षेत्र में अक्सर मनीष को ऐसा करते देखा जाता है। 
मनीष से बातचीत में पता चला कि उसकी दिनचर्या का एक हिस्सा जीव-जंतुओं के साथ ही बीतता है। वह अक्सर उनके साथ स्नेह भरे पल बिताते दिखता है। कभी अपने खर्च से उनकी भूख मिटाता है, तो कभी बीमार बेजुबानों को दवा देकर उनकी सहायता भी करता है।

मनीष ने बताया कि तकरीबन चार वर्ष से जीव-जंतुओं के प्रति उसका लगाव बढ़ चला है। इन बेजुबानों के साथ कुछ पल गुजारना और उनकी सहायता उसे आत्मीय सुकून से भर देता है। उसने बताया कि बीमार पशुओं के लक्षण देख वह रांची के पशु चिकित्सक से परामर्श लेता है और उनके अनुसार ही दवा देकर रोग ठीक करने का प्रयास भी करता है। चार वर्षों से यह सेवा कार्य उसके जीवन का अभिन्न हिस्सा सा बन गया है। मनीष के अनुसार अब इन रास्तों पर दिखते कई पशु उसे पहचानने भी लगे हैं और अपनी हरकतों से अपनत्व का एहसास भी कराते हैं। 
पशु प्रेमी मनीष ने बताया कि उसने रांची के ग्रोसनर कॉलेज से स्नातक किया है। हेल्थ फिटनेस में काफी रूचि है। फिलहाल वह फिटनेस सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफार्म पर manishnxt के नाम से हेल्थ और फिटनेस को लेकर टिप्स देता है और दूसरों को मोटिवेट करता है।

बहराल, आज के दौर में जहां एक इंसान दूसरे की भूख-प्यास और दु:ख-तकलीफों में मुंह मोड़ लेता है, वहां बेजुबानों की बेबसी पर युवा हृदय में यदि करूणा का सागर उफन पड़े तो समझिए कि कालान्तर तक कहीं न कहीं मानवता की ज्योत सदा ही जलती रहेगी।


