बड़कागांव (हजारीबाग): कर्णपुरा महाविद्यालय बड़कागांव के सभागार में शुक्रवार को इतिहास विभाग की ओर “भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में हजारीबाग की भूमिका” विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. कीर्ति नाथ महतो और संचालन इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुरेश महतो ने किया।
सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि प्रोफेसर ज्योति जलधर ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में हजारीबाग के आदिवासियों ने अद्वितीय और साहसी भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह जल, जंगल, जमीन और अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए विदेशी सत्ता व शोषण के खिलाफ एक निरंतर विद्रोह थी।
अवसर पर प्राचार्य डॉ. कीर्ति नाथ महतो ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में हजारीबाग ने विशेषकर 1857 के विद्रोह और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यहां के निवासियों और स्थानीय नेताओं ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ बढ़-चढ़कर संघर्ष किया। 1942 के आंदोलन में आनंदित साहू का नेतृत्व इसका प्रमुख उदाहरण है।
वहीं इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुरेश महतो ने किया। उन्होंने कहा कि बड़कू मांझी बड़कागांव के अंबा टोला के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे। साथ ही उन्होंने बताया कि सरस्वती देवी के नेतृत्व में 26 जनवरी 1930 को यहां तिरंगा फहराया गया था। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ललिता कुमारी ने प्रस्तुत किया।
अवसर पर डॉ. निरंजन प्रसाद नीरज, प्रोफेसर फजरूद्दीन, प्रोफेसर नरेश कुमार दांगी, प्रोफेसर लालदेव महतो, डॉ. अनु कुमारी, डॉ. रंजीत प्रसाद, डॉ. पवन कुमार, नमेधारी राम, तनवीर कुमार, अनिता कुमारी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। छात्रों में आशीष कुमार, चंदन कुमार, निशांत कुमार, मोहम्मद जुनेद, रमेश, नींबू कुमारी, सुमन कुमारी, प्रीति कुमारी आदि शामिल थे।
