केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को सौंपा ज्ञापन
रांची: सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन सौंप संताली भाषा की पढ़ाई उसकी मूल लिपि में कराने की मांग रखी। ज्ञापन में उन्होंने मांग करते हुए कहा है कि शिक्षा मंत्रालय और एनसीईआरटी द्वारा तैयार की जा रही संताली भाषा की पाठ्य पुस्तकें, संदर्भ सामग्री, शिक्षक मार्गदर्शिकाएं और डिजिटल कंटेंट देवनागरी के बजाय संताली की मूल लिपि ‘ओलचिकी’ में तैयार और प्रकाशित की जाए। रघुवर दास ने कहा कि संताली की अपनी स्वतंत्र, वैज्ञानिक और व्यापक रूप से प्रचलित लिपि ओलचिकी है। अपनी लिपि में पढ़ाई होने से भाषा की पहचान और संरक्षण को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने ओलचिकी के ऐतिहासिक महत्व का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में ओलचिकी लिपि के 100 वर्ष पूरे हुए हैं। इस अवसर पर केंद्र के संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ओलचिकी लिपि में अनूदित भारतीय संविधान का लोकार्पण किया था।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि 30 जून को हूल दिवस पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओलचिकी लिपि में संदेश देकर इस लिपि को सम्मान दिया। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में संताली को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था।
उन्होंने बताया कि झारखंड के संताल बहुल जिलों में रेलवे स्टेशनों और सरकारी कार्यालयों के नाम पहले से ही ओलचिकी में लिखे जा रहे हैं। साहित्य अकादमी पुरस्कार में भी संताली के लिए इसी लिपि का प्रयोग होता है। ओलचिकी का प्रयोग झारखंड, बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, असम के अलावा नेपाल और बांग्लादेश में भी होता है।
