रांची: झारखंड सरकार के गृह विभाग का अंडर सेक्रेटरी बताकर पुलिस अधिकारियों पर धौंस जमाने वाला एक जालसाज पिठौरिया पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। जिसकी पहचान अरुण कुमार अग्रवाल (52), पिता वशीधर अग्रवाल, निवासी अमरावती अपार्टमेंट, लालपुर निवासी के रूप में हुई है। जो कई वर्षों से ‘अजय कुमार’ के नाम से खुद को अंडर सेक्रेटरी होम डिपार्टमेंट बताकर अधिकारियों को फोन करता था और धौंस जमाते हुए पुलिसिया मामलों में दखल भी देता था।
मामले में पिठौरिया थाना प्रभारी सतीश कुमार के अनुसार आरोपी करीब एक साल से खुद को अंडर सेक्रेटरी बताकर फोन कर रहा था। वह वरीय पुलिस अधिकारियों से नजदीकी और उनकी पोस्टिंग में अपनी भूमिका होने का दावा करता था। पिठौरिया क्षेत्र के कई मामलों में पुलिस पर गैरकानूनी काम करने के लिए दबाव बनाने का भी आरोप है।
इस संबंध में पिठौरिया थाना कांड संख्या 97/2026 दर्ज किया गया है। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 204, 205, 338, 336(3), 340(2), 319(2) और 318(4) के साथ Official Secrets Act, 1923 की धारा 3, 5 और 6 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।
21 सितंबर को फर्जीवाड़े का हुआ भंडाफोड़
21 सितंबर को आरोपी ने थाना प्रभारी को चांदवे स्थित अपने घर बुलाकर बाहर हंगामे की सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो आरोपी ने वरीय अधिकारियों से अपनी पहुंच का हवाला देकर थाना प्रभारी पर ही रौब जमाना शुरू कर दिया। शक होने पर पुलिस ने उसकी ब्रेजा कार की तलाशी ली तो अंदर पुलिस का लोगो, सरकारी कार पास और कई संदिग्ध दस्तावेज मिले। इसके बाद उसे थाने लाया गया।
विभाग में अजय कुमार नामक कोई अंडर सेक्रेटरी नहीं
थाने में जब उससे सरकारी पहचान पत्र मांगा गया तो वह कोई वैध आईडी नहीं दिखा सका। गृह विभाग से सत्यापन कराया गया तो वहां अजय कुमार नाम का कोई अंडर सेक्रेटरी ही नहीं मिला। कड़ाई से पूछताछ में उसकी असली पहचान अरुण कुमार अग्रवाल के रूप में हुई। पुलिस के मुताबिक उसने स्वीकार किया कि वह कई सालों से अजय कुमार के नाम का इस्तेमाल कर रहा था।
जानें कार से क्या-क्या बरामद हुआ
पुलिस ने आरोपी की ब्रेजा कार और दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं, जिसमें एप्पल आईफोन 16 प्रो और सैमसंग गैलेक्सी एस-25 शामिल है। तलाशी में अजय कुमार, अवर सचिव गृह विभाग के नाम से दो फोटोयुक्त फर्जी आईडी, अजय कुमार, डीएसपी (एसबी) के नाम से दो फर्जी पहचान पत्र, राजभवन के पांच हरे कार पास, गृह विभाग के पांच मंत्रालय कार पास स्टीकर, कार पास बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले छह स्टीकरयुक्त ए-4 कागज, पुलिस का लोगो और सरकारी स्टीकर मिले।
कई फर्जी कागजात मिले
जांच पड़ताल में पुलिस को विशेष शाखा से संबंधित वर्ष 2022 के नक्सली संगठन की पुरस्कार राशि के नवीनीकरण और घोषणा से जुड़े गोपनीय पत्र मिले हैं। पुलिस निरीक्षक से डीएसपी में पदोन्नति संबंधी डीजीपी पर्षद की बैठक की कार्यवाही और आईपीएस में पदोन्नति से जुड़े गृह विभाग के दस्तावेज भी मिले हैं, जो प्रथम दृष्टया जाली और कूटरचित पाए गए हैं। इसके साथ ही विभिन्न विभागों के लेटर पैड भी बरामद हुए हैं।
कार पर लगाता था नकली लोगो
पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने बताया कि कार पर मंत्रालय का लोगो और कार पास लगाने से ट्रैफिक पुलिस उसे रोकती नहीं थी। वह पार्किंग शुल्क से बच जाता था और मंत्रालय में बिना रोक-टोक के प्रवेश भी कर जाता था। पुलिस अब जांच कर रही है कि उसे सरकारी गोपनीय दस्तावेज कहां से मिले और वह अब तक किन अधिकारियों के संपर्क में था।
