रांची: जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और अधिकारों की मांग को लेकर 9 अक्टूबर को रांची में मौन भाषा यात्रा निकाली जाएगी। जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा बचाओ मंच के नेतृत्व में यात्रा मोरहाबादी से शुरू होकर मेन रोड तक जाएगी। शिक्षकों की पदोन्नति और भाषा विद्यार्थियों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना मंच की प्रमुख मांगों में शामिल है।
मंच के अनुसार, 1986 में विभाग की शुरुआत के बाद से जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा के शिक्षकों को पदोन्नति नहीं मिली है। वर्तमान में करीब 10-12 शिक्षक ही सेवा में बचे हैं। मंच ने प्राथमिक, माध्यमिक विद्यालयों और कॉलेजों में नौ जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के नियमित पद सृजित करने की मांग की है।
मांगों को लेकर पिछले दो महीने से अभियान चल रहा है। 4 जुलाई को रांची विश्वविद्यालय में भाषा कॉन्क्लेव और 22 जुलाई को जनजातीय एवं क्षेत्रीय शोध संस्थान में भाषा संवाद आयोजित किया गया था।
मौन भाषा यात्रा पहले 29 सितंबर को प्रस्तावित थी, लेकिन शोक के माहौल के कारण इसे स्थगित कर 9 अक्टूबर किया गया। मंच ने मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।
