मांडर/रांची : नगड़ा उचरी कनभीठा में मंगलवार को आयोजित ऐतिहासिक जितिया जतरा में हजारों लोगों की भीड़ जुटी। ‘जय चाला’ के जयघोष के बीच शुरू हुए आयोजन में पारंपरिक संस्कृति और सामाजिक एकजुटता का रंग देखने को मिला। पारंपरिक वेशभूषा में आदिवासी महिलाओं के सामूहिक नृत्य ने लोगों का विशेष ध्यान खींचा।

जतरा के दौरान लोक संस्कृति और परंपरा से जुड़े विभिन्न रंग देखने को मिले। आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में ग्रामीण आयोजन में पहुंचे। समिति की ओर से जतरा को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया गया।
राजकीय महोत्सव का दर्जा देने की मांग
कार्यक्रम में सरना धर्मगुरु बंधन तिग्गा ने युवाओं से अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहने की अपील की। उन्होंने जितिया पेड़ और जतरा को सरना संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
मांडर प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष मांगा उरांव ने जतरा समिति के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इस ऐतिहासिक आयोजन को राजकीय महोत्सव का दर्जा देने की मांग की।
चार गांवों की एकता का प्रतीक
जतरा समिति के अध्यक्ष और नगड़ा पंचायत के मुखिया बहादुर उरांव ने कहा कि यह आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है। यह चार गांवों की एकता, सुरक्षा और विकास की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास पर जोर दिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सरना धर्मगुरु बंधन तिग्गा और अनिल उरांव शामिल हुए। विशिष्ट अतिथि के रूप में मांडर प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष मांगा उरांव मौजूद रहे।
मंच पर समिति के सचिव विनोद भगत, उप मुखिया स्टफेंसन उरांव, अबुल अंसारी, जीतू उरांव, हाजी सेराजुद्दीन साहब और हतीम अंसारी सहित समिति के अन्य सदस्य मौजूद रहे। समापन पर सचिव विनोद भगत ने ग्रामीणों, कलाकारों और अतिथियों के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।

